उत्तर प्रदेश के हापुड़ के पिलखुवा में राकेश आनंद और रूपिका आनंद ने दुबई की नौकरी छोड़कर खेती में एक अनोखा और सफल मॉडल तैयार किया है। उनका मानना है कि खेती में असली चुनौती पैदावार नहीं बल्कि सही मार्केटिंग और वैल्यू एडिशन है। बेसहारा गायों के गोबर-गोमूत्र से खाद बनाकर उन्होंने खेती की इनपुट लागत लगभग शून्य कर दी, वहीं सोलर प्लांट से बिजली पैदा कर डिलीवरी वाहनों को चार्ज कर ईंधन खर्च भी खत्म कर दिया। पारंपरिक फसलों की जगह बाजार की मांग के अनुसार ज़ुकिनी जैसी सब्जियां उगाकर 5 गुना ज्यादा कमाई कर रहे हैं। साथ ही कच्चे उत्पादों से आगे बढ़कर तेल, हर्बल टी, अचार, मल्टीग्रेन प्रोडक्ट्स और जंगली शहद जैसे वैल्यू एडेड उत्पाद बनाकर सीधे ग्राहकों तक बेच रहे हैं, जिससे खेती को एक सफल एग्री-बिजनेस मॉडल में बदल दिया है।
HIGHLIGHTS
दुबई की नौकरी छोड़कर गांव में बनाया सफल खेती मॉडल
खेती में असली चुनौती पैदावार नहीं, मार्केटिंग और वैल्यू एडिशन
बेसहारा गायों के गोबर से बनाई खाद, लक्ष्य रखा जीरो इनपुट कॉस्ट खेती
सोलर प्लांट से बिजली और डिलीवरी चार्जिंग, ईंधन खर्च किया जीरो
बाजार की मांग समझकर ज़ुकिनी जैसी फसलों से 5 गुना ज्यादा कमाई
कच्चे माल से आगे बढ़कर तेल, हर्बल टी, अचार और शहद जैसे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स से मुनाफा