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उत्तर प्रदेश : बंदरों से फसल बचाने के लिए किसान 4000 रुपये खर्च बना भालू, वायरल हुआ वीडियो

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 18 Mar 2026 02:39 PM IST
सार

लगातार हो रहे नुकसान से परेशान होकर किसान धरमबीर ने करीब 4000 रुपये खर्च कर भालू की पोशाक खरीदी। अब वह और उनके कुछ साथी इस पोशाक को पहनकर खेतों में घूमते हैं। 

बंदरों से फसल बचाने के लिए किसान 4000 रुपये खर्च बना भालू
बंदरों से फसल बचाने के लिए किसान 4000 रुपये खर्च बना भालू - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

खेती में नुकसान झेल रहे किसान अक्सर नए-नए उपाय अपनाते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक किसान का तरीका सबका ध्यान खींच रहा है। बंदरों के आतंक से परेशान होकर किसान ने भालू की पोशाक पहन ली और खेत में उतर गया। हैरानी की बात यह है कि यह अनोखा जुगाड़ फिलहाल कारगर भी साबित हो रहा है।

फसलों पर बंदरों का हमला, किसान परेशान
संभल जिले के फिरोजपुर गांव के किसान धरमबीर लंबे समय से बंदरों के आतंक से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इलाके में 100 से ज्यादा बंदर हैं, जो रोजाना खेतों में घुसकर आलू और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उनकी मेहनत बर्बाद हो रही है।

भालू की पोशाक पहनकर खेत में उतरे किसान
लगातार हो रहे नुकसान से परेशान होकर धरमबीर ने करीब 4000 रुपये खर्च कर भालू की पोशाक खरीदी। अब वह और उनके कुछ साथी इस पोशाक को पहनकर खेतों में घूमते हैं। उनका कहना है कि इस वेश में देखकर बंदर डर जाते हैं और खेतों से दूर भाग जाते हैं। धरमबीर ने बताया, “बंदर हमारे खेतों में रोज आते हैं और फसल खराब कर देते हैं। लेकिन जब हम भालू की तरह दिखते हैं, तो वे पास नहीं आते।”

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस अनोखे जुगाड़ का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। इसे लाखों बार देखा जा चुका है और हजारों लोगों ने इसे पसंद किया है। लोग किसान की इस कोशिश की सराहना कर रहे हैं, लेकिन साथ ही यह भी कह रहे हैं कि यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

वन विभाग की प्रतिक्रिया
स्थानीय वन रक्षक मनोज कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि बंदरों को पकड़कर उन्हें जंगल में स्थानांतरित करने के प्रयास किए जाएंगे। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि भालू की पोशाक पहनना केवल अस्थायी उपाय है और इससे समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी।

किसानों की मांग- स्थायी समाधान जरूरी
गांव के किसान अब प्रशासन और वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह की समस्या से निपटने के लिए ठोस नीति और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि खेती को नुकसान से बचाया जा सके।संभल का यह मामला एक ओर किसानों की मजबूरी और जुगाड़ को दिखाता है, तो दूसरी ओर यह भी बताता है कि वन्यजीवों का बढ़ता हस्तक्षेप खेती के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अब समय है कि इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान खोजा जाए, ताकि किसानों की मेहनत सुरक्षित रह सके।