Home›Khabar Junction›
Cag Report Punjab Villages Still Have Contaminated Water Negligence In Schemes Exposed
CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा : पंजाब के गांवों में अब भी दूषित पानी, योजनाओं में लापरवाही उजागर
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 18 Mar 2026 02:52 PM IST
सार
पंजाब सरकार ने अपने जवाब में माना कि सभी प्रभावित गांवों में अभी तक सुधार नहीं हो पाया है और इस दिशा में काम जारी है। हालांकि CAG ने सरकार की इस बात पर सवाल उठाया कि शुरुआत में ही दूषित जल स्रोतों को क्यों चुना गया और तय समय (मार्च 2021) तक सुरक्षित पानी उपलब्ध क्यों नहीं कराया गया।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
Link Copied
विस्तार
पंजाब में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार, जल जीवन मिशन जैसे अहम कार्यक्रम के बावजूद राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में लोगों को अब भी दूषित पानी मिल रहा है। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में अन्य योजनाओं में भी नियमों की अनदेखी सामने आई है।
दूषित पानी की सप्लाई बनी बड़ी समस्या
CAG रिपोर्ट के मुताबिक, जल जीवन मिशन के तहत साफ पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए थी, खासकर उन इलाकों में जहां पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे खतरनाक तत्व मौजूद हैं। लेकिन इसके उलट, पंजाब में कई जगहों पर दूषित जल स्रोतों से ही पाइपलाइन के जरिए पानी सप्लाई किया जाता रहा। अप्रैल 2020 तक राज्य के 1,634 गांव दूषित पानी से प्रभावित थे। इनमें 815 गांवों में आर्सेनिक और 319 गांवों में फ्लोराइड युक्त पानी दिया जा रहा था, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
सुधार के बावजूद समस्या बरकरार
हालांकि समय के साथ कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन स्थिति पूरी तरह नहीं सुधरी। अप्रैल 2023 तक 1,114 गांवों में अब भी दूषित पानी पहुंच रहा था। यहां तक कि अप्रैल 2024 में भी 101 गांवों में घर-घर नल कनेक्शन के जरिए गंदा पानी सप्लाई किया जा रहा था। CAG ने इसे जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन में गंभीर चूक बताया और कहा कि सरकार प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता देने में विफल रही।
सरकार का जवाब और CAG की आपत्ति
पंजाब सरकार ने अपने जवाब में माना कि सभी प्रभावित गांवों में अभी तक सुधार नहीं हो पाया है और इस दिशा में काम जारी है। हालांकि CAG ने सरकार की इस बात पर सवाल उठाया कि शुरुआत में ही दूषित जल स्रोतों को क्यों चुना गया और तय समय (मार्च 2021) तक सुरक्षित पानी उपलब्ध क्यों नहीं कराया गया।
शगुन योजना में भी नियमों की अनदेखी
रिपोर्ट में “शगुन योजना” में भी गड़बड़ी सामने आई है। इस योजना के तहत बेटियों की शादी के लिए 31,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है, जिसके लिए विवाह प्रमाण पत्र जरूरी होता है। ऑडिट में 146 मामलों की जांच की गई, जिसमें पाया गया कि 59 लाभार्थियों (करीब 40%) को बिना विवाह प्रमाण पत्र के ही 18.29 लाख रुपये दे दिए गए। बोर्ड ने सफाई दी कि धार्मिक संस्थानों के प्रमाण पत्र के आधार पर सहायता दी गई, लेकिन CAG ने इसे असंतोषजनक बताते हुए कहा कि यह नियमों का सीधा उल्लंघन है और इससे धोखाधड़ी का खतरा बढ़ सकता है।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।