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Ethanol Export: केंद्र सरकार ने दूसरे चरण के इथेनॉल के ईंधन निर्यात को दी मंजूरी, DGFT ने जारी की नई शर्तें

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Thu, 25 Sep 2025 09:58 AM IST
सार

डीजीएफटी ने स्पष्ट किया है कि दूसरे चरण के इथेनॉल का निर्यात ईंधन और गैर-ईंधन दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा, लेकिन इसके लिए दो शर्तें अनिवार्य हैं। 

चावल से इथेनॉल
चावल से इथेनॉल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत सरकार ने दूसरे चरण (Second-Generation) के इथेनॉल के निर्यात को अब ईंधन उद्देश्यों के लिए भी अनुमति दे दी है। पहले यह केवल गैर-ईंधन उद्देश्यों के लिए ही अनुमति प्राप्त था। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने बुधवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि यह निर्णय हरित ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।

क्या है दूसरा चरण इथेनॉल
यह इथेनॉल उन सेलुलोसिक सामग्रियों से तैयार होता है जो खाद्य फसलों से प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं। इनमें गन्ने का बगास, लकड़ी का कचरा, कृषि एवं वानिकी अवशेष (जैसे धान और गेहूं का पुआल, मक्का), गैर-खाद्य फसलें (घास, शैवाल) और औद्योगिक अपशिष्ट शामिल हैं। इसकी खासियत यह है कि इसमें कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है और यह ग्रीनहाउस गैसों को कम करने में मदद करता है।

निर्यात के लिए शर्तें
डीजीएफटी ने स्पष्ट किया है कि दूसरे चरण के इथेनॉल का निर्यात ईंधन और गैर-ईंधन दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा, लेकिन इसके लिए दो शर्तें अनिवार्य हैं—
  • वैध निर्यात अनुमति (Export Authorisation)
  • फीडस्टॉक सर्टिफिकेशन — जिसे संबंधित सक्षम प्राधिकरण से लेना होगा।

ट्रेड नोटिस के अनुसार, निर्यातक कंपनियों के खेप (consignments) की जांच की जाएगी ताकि अधिसूचना के अनुरूप अनुपालन सुनिश्चित हो सके।

सर्टिफिकेट कौन देगा
फीडस्टॉक का सर्टिफिकेट राज्य आबकारी विभाग या NABCB से मान्यता प्राप्त थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसी (TPIA) जारी कर सकती है। इन प्रमाणपत्रों को संबंधित खेप और बिल (invoice) से स्पष्ट रूप से जोड़ा जाना अनिवार्य होगा।