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किसानों को बड़ी राहत: मध्य प्रदेश सरकार ने ‘बिजली काटने’ वाला आदेश रद्द किया, CGM पद से हटाए गए

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Thu, 06 Nov 2025 10:54 AM IST
सार

इस आदेश ने किसानों में भारी रोष पैदा कर दिया था। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, “सरकार खुद को किसान हितैषी बताती है लेकिन हकीकत में किसानों के खिलाफ आदेश जारी किए जा रहे हैं। यह किसानों के साथ सीधा अन्याय है।”

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - फोटो : ai

विस्तार

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार ने कृषि फीडरों पर बिजली आपूर्ति सीमित करने वाले विवादित आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) अजय कुमार जैन को उनके पद से हटा दिया है।

यह फैसला उस समय लिया गया जब किसानों और विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ तेज विरोध शुरू कर दिया था। आदेश में कहा गया था कि 10 घंटे से अधिक बिजली देने पर अधिकारियों के वेतन में कटौती की जाएगी जिससे किसानों में भारी नाराजगी फैल गई थी।

क्या था विवादित आदेश?
3 नवंबर को मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने परिपत्र (क्रमांक 676) जारी किया था। इसमें लिखा गया था कि यदि किसी कृषि फीडर पर 10 घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति दर्ज होती है, तो संबंधित अधिकारी AE/AEEM, DGM और GM के वेतन से एक दिन का वेतन काटा जाएगा।

आदेश में यह भी कहा गया था कि अधिकतम 15 मिनट तक की तकनीकी त्रुटि को ही स्वीकार किया जाएगा। यानी यदि किसी फीडर पर बिजली आपूर्ति 10 घंटे और 1 मिनट भी अधिक हुई तो यह “उल्लंघन” माना जाएगा और अधिकारी पर कार्रवाई होगी।

किसानों में गुस्सा और विपक्ष का हमला
इस आदेश ने किसानों में भारी रोष पैदा कर दिया था। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, “सरकार खुद को किसान हितैषी बताती है लेकिन हकीकत में किसानों के खिलाफ आदेश जारी किए जा रहे हैं। यह किसानों के साथ सीधा अन्याय है।”

कई किसान संगठनों ने भी कहा कि कृषि फीडरों पर बिजली सीमित करने से सिंचाई कार्य बाधित होगा और फसलों को नुकसान पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का हस्तक्षेप
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया। उन्होंने ऊर्जा विभाग को आदेश दिया कि “किसानों को बिजली आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए” और कंपनी द्वारा जारी आदेश को तुरंत रद्द किया जाए।

सीएम ने साथ ही कंपनी के सीजीएम अजय जैन को उनके पद से हटाने का निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा, “सरकार का लक्ष्य किसानों को दंड देना नहीं, बल्कि सुविधा देना है। किसानों को पर्याप्त और निर्बाध बिजली मिलनी चाहिए।”

समाधान योजना के दौरान जारी हुआ था आदेश
गौरतलब है कि यह विवादित आदेश उस समय जारी हुआ था जब मुख्यमंत्री ने हाल ही में ऊर्जा विभाग की ‘समाधान योजना’ की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं को तीन महीने या उससे अधिक के बकाया बिजली बिलों पर सरचार्ज माफी दी जा रही है। किसानों ने नाराजगी जताई कि “एक ओर सरकार राहत योजना लागू कर रही है, दूसरी ओर बिजली काटने वाले आदेश जारी कर रही है।”

किन जिलों पर था असर?
आदेश की प्रतियां प्रदेश के उन जिलों को भेजी गई थीं जहां खेती का दायरा सबसे बड़ा है। इनमें भोपाल, ग्वालियर, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, रायसेन, हरदा, विदिशा, अशोकनगर, गुना, भिंड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी और दतिया शामिल हैं। इन इलाकों के किसान इस आदेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे।

किसानों में राहत और सरकार की सराहना
सरकार द्वारा आदेश रद्द किए जाने और सीजीएम को पद से हटाने के बाद किसानों में राहत और संतोष की लहर है। किसान संगठनों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह “विवेकपूर्ण और किसान हितैषी कदम” है जिसने समय रहते किसानों के साथ होने वाले अन्याय को रोक दिया।