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इंग्लिश टीचर वाला गांव : हर घर में ट्यूशन सेंटर, गलियों में गूंजती है अंग्रेजी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 20 Sep 2025 01:05 PM IST
सार

गांव में आम और लीची की खेती, जूट और रेशम का कारोबार भी होता है, लेकिन असली पहचान इंग्लिश टीचिंग से बनी है। यहां के कॉलेज और ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स अब दूर-दराज के छात्रों को आकर्षित कर रहे हैं।

इंग्लिश टीचर वाला गांव
इंग्लिश टीचर वाला गांव - फोटो : AI Image

विस्तार

पश्चिम बंगाल का मालदा जिला न सिर्फ आम और लीची की खेती के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां का कालियाचक गांव एक अनोखी वजह से सुर्खियों में रहता है। दूर से यह गांव साधारण लगता है, लेकिन इसकी पहचान है, हर घर में इंग्लिश टीचर। गांव की गलियों में चलते हुए कहीं बच्चों को IELTS की प्रैक्टिस करते सुना जा सकता है, तो कहीं शिक्षक ऑनलाइन क्लास के लिए तैयारी करते दिख जाते हैं। यहां इंग्लिश सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की जीवनशैली और करियर का अहम हिस्सा बन चुकी है।

स्कूलों और अकादमियों की बड़ी भूमिका
गांव के इस बदलाव की नींव दशकों पहले पड़ी थी। यहां के फैजी अकादमी और तर्बियत पब्लिक स्कूल जैसे संस्थानों ने बच्चों को स्पोकन इंग्लिश की मजबूत नींव दी। इन स्कूलों से पढ़े लोग आज न सिर्फ गांव में बल्कि बड़े शहरों और विदेशों में भी इंग्लिश टीचिंग कर रहे हैं।

घर-घर में कोचिंग सेंटर
कालियाचक की खासियत यह है कि यहां हर गली में ट्यूशन सेंटर मिल जाएंगे। कई परिवार छोटे-छोटे ट्रेनिंग हब चला रहे हैं, ताकि अगली पीढ़ी भी इस परंपरा को आगे बढ़ा सके। गांव के सैकड़ों टीचर्स दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु तक पढ़ा रहे हैं, तो कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी छात्रों को भी इंग्लिश सिखा रहे हैं।

रोजगार और पहचान का नया रास्ता
हालांकि गांव में आम और लीची की खेती, जूट और रेशम का कारोबार भी होता है, लेकिन असली पहचान इंग्लिश टीचिंग से बनी है। यहां के कॉलेज और ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स अब दूर-दराज के छात्रों को आकर्षित कर रहे हैं। कालियाचक गांव की कहानी बताती है कि अगर शिक्षा को सही दिशा दी जाए तो यह न सिर्फ समाज की पहचान बदल सकती है, बल्कि रोजगार और विकास के नए रास्ते भी खोल सकती है।