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Himachal Pradesh Spiti Valley Village Kakti Has Population Of Six People And Connected To Digital India With 3
हिमाचल का अनोखा गांव : आबादी 6 लोगों की, जुड़ा है डिजिटल इंडिया से, 300 साल पुराना है घर
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Mon, 05 Jan 2026 03:06 PM IST
सार
गांव की कुल आबादी 6 लोगों की है। गांव का एकमात्र घर मिट्टी और पत्थरों से बना 300 साल पुराना मड हाउस है। यह घर गर्मियों में प्राकृतिक रूप से ठंडा और सर्दियों में गर्म रहता है।
हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में स्थित काकती गांव
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में स्थित काकती गांव इन दिनों चर्चा में है। यह देश का पहला ऐसा गांव है, जहां केवल एक ही घर और एक ही परिवार के छह सदस्य वर्षों से रहते हैं। हाल ही में BSNL द्वारा 4G मोबाइल टावर स्थापित होने के बाद यह गांव डिजिटल इंडिया से जुड़ गया है, जिससे परिवार के सदस्य अब देश-विदेश की खबरें आसानी से पा सकते हैं।
स्पीति घाटी के काजा से लगभग 10 किलोमीटर दूर बसा काकती गांव एक ऊंचे पहाड़ी टीले पर स्थित है। गांव में केवल दो भाइयों का परिवार रहता है, छोटे भाई कलजंग टाकपा और बड़े भाई छेरिंग नामगयल, जिनकी पत्नी रिंगजिन यूडन भी उनके साथ रहती हैं।
6 लोगों से गांव की आबादी
गांव की कुल आबादी 6 लोगों की है। इनमें दोनों भाई कलजंग और छेरिंग नामगयल उनकी पत्नी रिंगजिन यूडन, सोनम छोपेल लामा (बेटा), नवांग ज्ञालसन और नवांग कुंगा (टैक्सी चलाते हैं) शामिल हैं। जानकारों के अनुसार, यह परिवार अपने वंश की पांचवी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। राजस्व रिकॉर्ड में भी काकती गांव दर्ज है और सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार, गांव में कुल 15 बीघा जमीन है।
300 साल पुराना मड हाउस
गांव का एकमात्र घर मिट्टी और पत्थरों से बना 300 साल पुराना मड हाउस है। यह घर गर्मियों में प्राकृतिक रूप से ठंडा और सर्दियों में गर्म रहता है। जब बाहर का तापमान शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस तक गिरता है, तब भी यह परिवार को सुरक्षित रखता है। छेरिंग नामगयल ने कहा कि पहले उन्हें देश-दुनिया की खबरें हफ्तों बाद मिलती थीं, लेकिन अब मोबाइल कनेक्टिविटी और 4G के जरिए वे पल-पल की खबरों से अपडेट रहते हैं।
साधारण जीवन और प्राकृतिक संघर्ष
भले ही गांव तक बिजली और सड़क पहुंच गई है, लेकिन सर्दियों में परिवार छह महीने के लिए राशन और पानी जमा करके कठिन मौसम का सामना करता है। छेरिंग ने बताया, “हमें शहर बिल्कुल पसंद नहीं है। कभी-कभी रिवालसर या नैनीताल जाना होता है, लेकिन वहां भी अधिक दिन नहीं रुकते। हमारा जीवन यहां सरल और प्रकृति के करीब है।” काकती गांव का यह परिवार अपने पूर्वजों की धरोहर और हिमालयी जीवन शैली को बनाए हुए है, और अब डिजिटल इंडिया से जुड़कर भी अपनी पारंपरिक जीवनशैली के साथ आगे बढ़ रहा है।
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