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Unique Village In India Wearing Shoes Prohibited Here Villagers Have Lived Barefoot For Centuries
भारत का अनोखा गांव : यहां जूते-चप्पल पहनना है मना, सदियों से नंगे पांव रह रहे ग्रामीण
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 17 Sep 2025 03:27 PM IST
सार
वेल्लागवी गांव सड़कों से जुड़ा नहीं है, इसलिए यहां तक पहुंचने के लिए कोई वाहन सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस पवित्र गांव तक पहुंचने का एकमात्र तरीका पैदल यात्रा है, जो इसकी धार्मिक पवित्रता को और भी खास बना देता है।
यहां जूते-चप्पल पहनना है मना
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत परंपराओं और आस्थाओं का देश है, जहां आज भी कई जगहें अपनी अनूठी रीति-रिवाजों के लिए जानी जाती हैं। तमिलनाडु के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कोडईकनाल के पास स्थित वेल्लागवी गांव अपनी अनोखी परंपराओं और धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है। यह छोटा सा गांव इतना पवित्र माना जाता है कि यहां जूते-चप्पल पहनना पूरी तरह वर्जित है। गांव की सीमा के भीतर किसी भी व्यक्ति को जूते-चप्पल पहनने की अनुमति नहीं है।
देवताओं को समर्पित है गांव
ये गांव लोगों की आस्था है। यहां के लोग बताते हैं कि गांव में मंदिरों की संख्या घरों से भी ज्यादा है, और पूरा गांव देवताओं को समर्पित माना जाता है। इस कारण गांव की सीमाओं के भीतर निवासी हों या आगंतुक, किसी को भी जूते-चप्पल पहनने की अनुमति नहीं होती। अगर कोई गलती से भी जूते-चप्पल पहन लेता है, तो उसे सजा दी जाती है। गांववासी इसे अपने देवी-देवताओं का अपमान मानते हैं।
सदियों से निभाई जा रही परंपरा
मदुरै शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी लोग नंगे पांव ही रहते हैं। यहां तक कि अगर कोई जिला मजिस्ट्रेट या सांसद भी गांव में आए, तो उन्हें भी जूते-चप्पल बाहर ही उतारने पड़ते हैं। गांव में ये परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। हालांकि इस परंपरा की शुरुआत कब हुई, इसकी सटीक जानकारी किसी को नहीं है, लेकिन गांववाले कहते हैं कि कई पीढ़ियों से यह परंपरा चली आ रही है। यहां के बच्चे स्कूल भी नंगे पांव ही जाते हैं और जूते-चप्पल का जिक्र होते ही लोग नाराज हो जाते हैं।
अपाच्छी देवता की पूजा
गांव के लोग अपाच्छी देवता की पूजा करते हैं, उनका मानना है कि वे ही उनकी रक्षा करते हैं। उनके प्रति श्रद्धा और आस्था के कारण गांव में सदियों से जूते-चप्पल पहनने पर रोक की परंपरा चली आ रही है। गांव के लोग बताते हैं कि अगर किसी को गांव से बाहर जाना होता है, तो वे जूते-चप्पल हाथ में लेकर सीमा पार करने के बाद ही पहनते हैं, और लौटते समय सीमा के पास ही उतार देते हैं। अगर कोई गलती से भी गांव के भीतर चप्पल पहन लेता है, तो उसे कठोर सजा दी जाती है।
गांव के लिए पैदल यात्रा
वेल्लागवी गांव सड़कों से जुड़ा नहीं है, इसलिए यहां तक पहुंचने के लिए कोई वाहन सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस पवित्र गांव तक पहुंचने का एकमात्र तरीका पैदल यात्रा है, जो इसकी धार्मिक पवित्रता को और भी खास बना देता है। यह गांव आज भी परंपराओं को संजोए हुए है और आधुनिकता के दौर में भी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जीवित रखे हुए है।
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