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Rural Traditions: सैकड़ों साल से अपने पूर्वजों का वचन निभा रहा ये अनोखा गांव, परंपरा और आस्था की है मिसाल
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 07 Sep 2025 06:06 PM IST
सार
राजस्थान के अजमेर से 60 किमी दूर देवमाली गांव सैकड़ों वर्षों से अपनी अनोखी परंपरा निभा रहा है। 300 परिवारों का यह गांव भगवान देवनारायण को दिया पूर्वजों का वचन आज भी निभा रहा है।
सैकड़ों साल से अपने पूर्वजों का वचन निभा रहा ये अनोखा गांव
- फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
देश में करीब 6.5 लाख गांव हैं। हर गांव अपनी अलग पहचान रखता है। गांव की संस्कृति और परंपराएं उन्हें अलग बनाती हैं। ऐसा ही एक गांव है, राजस्थान के अजमेर जिले से 60 किलोमीटर दूर, जो आस्था, परंपरा और सादगी की अद्भुत मिसाल है।
इस गांव को देवमाली नाम से जाना जाता है, जो सदियों से अपनी अनूठी परंपरा निभा रहा है। यहां के 300 परिवार आज भी कच्चे मकानों में रहते हैं और चूल्हे पर ही खाना पकाते हैं। गांववालों का मानना है कि उनके पूर्वजों ने भगवान देवनारायण को यह वचन दिया था, जिसे आज तक निभाया जा रहा है।
देवमाली की खासियत
गांव में 300 परिवार कच्चे घरों में रहते हैं। गांव की 3500 बीघा जमीन भगवान देवनारायण के नाम पर है। 2000 बीघा चारागाह गांव के मवेशियों के लिए है।2024 में गांव को ‘बेस्ट ट्यूरिस्ट विलेज’ का दर्जा मिला। गांव में सैकड़ों वर्षों से घरों में चूल्हे पर ही भोजन पकाया जाता है, यह सिलसिला आज तक जारी है। गांव में ताले लगाने की परंपरा नहीं है।
सरकारी योजनाओं से वंचित
गांव की सारी जमीन भगवान के नाम होने के कारण ग्रामीण कई सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते। बावजूद इसके गांव में गरीबी या असमानता का माहौल नहीं है। यहां के युवा पढ़-लिखकर अच्छी नौकरियों तक पहुंचे हैं, लेकिन परंपरा निभाने के लिए गांव में पक्का मकान नहीं बनाया जाता।
बेस्ट ट्यूरिस्ट विलेज का दर्जा
सितंबर 2024 में देवमाली को ‘बेस्ट ट्यूरिस्ट विलेज’ घोषित किया गया। इस सम्मान के बाद गांव में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर बढ़ने लगे हैं। अब यहां देश-विदेश से पर्यटक गांव की सादगी, आस्था और परंपरा को देखने आते हैं।
आस्था और परंपरा का प्रतीक
देवमाली गांव इस बात की मिसाल है कि आधुनिक समय में भी लोग अपनी आस्था और पूर्वजों की परंपरा को कितनी श्रद्धा से निभा सकते हैं। यहां के लोग कहते हैं, "हम पक्के मकान बना सकते हैं, लेकिन भगवान को दिया वचन हमें आज भी बांधे हुए है।"
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