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बनारसी लौंगलता और नाव शिल्प को मिलेगा GI टैग: 34 जीआई उत्पादों वाला दुनिया का पहला शहर बनेगा वाराणसी, जानें

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Fri, 19 Sep 2025 10:25 AM IST
सार

जीआई टैग की इस सूची में अन्य राज्यों के उत्पाद भी हैं जिनमें मिर्जापुर की बजरी, रामकेड़ा आम, सूरत डायमंड, पानीपत खेस टेक्सटाइल, त्रिपुरा चकमा वस्त्र, हिमाचल वुड कार्विंग, नागालैंड मौलम पाइनएप्पल, मिजोरम दारजो चाय, जयपुरी रजाई और मेघालय बांस क्राफ्ट शामिल हैं।

लौंगलत्ता
लौंगलत्ता - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

वाराणसी एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक और परंपरागत पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने जा रहा है। मशहूर बनारसी लौंगलता मिठाई और पारंपरिक नाव शिल्प को भी जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग की सूची में शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही वाराणसी दुनिया का पहला ऐसा शहर बन जाएगा जिसके पास 34 जीआई टैग उत्पादों का गौरव होगा। वर्तमान में यहां के 32 उत्पाद पहले ही जीआई टैग की मान्यता प्राप्त कर चुके हैं और अब ये दो नए जुड़ने वाले उत्पाद काशी की पहचान को और मजबूत करेंगे।

जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर उनके संसदीय क्षेत्र से जीआई टैग के लिए 75वां आवेदन गुजरात के सोमपुरा स्टोन क्राफ्ट के लिए किया गया। इसी क्रम में बनारस से नाव शिल्प और लौंगलता मिठाई को भी आवेदन सूची में शामिल किया गया है।

अन्य राज्यों के उत्पाद भी शामिल
जीआई टैग की इस सूची में अन्य राज्यों के उत्पाद भी हैं जिनमें मिर्जापुर की बजरी, रामकेड़ा आम, सूरत डायमंड, पानीपत खेस टेक्सटाइल, त्रिपुरा चकमा वस्त्र, हिमाचल वुड कार्विंग, नागालैंड मौलम पाइनएप्पल, मिजोरम दारजो चाय, जयपुरी रजाई और मेघालय बांस क्राफ्ट शामिल हैं।

सांस्कृतिक धरोहर को मिलेगा संरक्षण
डॉ. रजनीकांत ने कहा कि इस उपलब्धि को हासिल करने में नाबार्ड, वस्त्र मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, डोनर मंत्रालय और भारत सरकार के कई विभागों का सहयोग रहा। किसी एक संस्था द्वारा एक वर्ष में 75 जीआई आवेदन करना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि काशी का यह योगदान न केवल भारत की बौद्धिक संपदा और सांस्कृतिक धरोहर को कानूनी संरक्षण देगा, बल्कि इन उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।