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Tumbbad Village: इतिहास, लोककथाएं और पर्यटन का संगम रहस्यमयी गांव तुम्बाड
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Thu, 11 Sep 2025 04:17 PM IST
सार
तुम्बाड गांव इतिहास, लोककथाओं और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। यदि आप रहस्यमयी जगहों की सैर करना पसंद करते हैं, तो महाराष्ट्र का यह छोटा-सा गांव आपके लिए एक यादगार अनुभव साबित होगा।
इतिहास, लोककथाएं और पर्यटन का संगम रहस्यमयी गांव तुम्बाड
- फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र के रत्नागिरी जिले में पर्वतों की गोद और जगबूदी नदी के किनारे बसा तुम्बाड गांव रहस्य और रोमांच से भरा हुआ है। यह गांव न सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और प्राचीन धरोहरों के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां की लोककथाएं और मिथक इसे और भी अद्भुत बना देते हैं। तुम्बाड गांव में कई प्राचीन मंदिर और किले मौजूद हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां कभी शक्तिशाली राजाओं और सामंतों का वास हुआ करता था। पुरानी इमारतें और किलेबंदी आज भी उस गौरवशाली अतीत की गवाही देती हैं।
मराठा काल से जुड़ा इतिहास
तुम्बाड का इतिहास मराठा साम्राज्य के दौर से जुड़ा हुआ है। यहां की कुछ प्राचीन संरचनाएं और वाड़ा (महलनुमा घर) उसी काल की याद दिलाते हैं। सरदार अंबाजी पुरंदरे के लिए 1703 में निर्मित विशाल वाड़ा आज भी मौजूद है, जिसमें दो आंगन, एक पानी का हौद और गणपति मंदिर स्थित है। हालांकि खंडहर और वनस्पति से ढंका यह परिसर अब केवल अनुमति लेकर ही देखा जा सकता है।
लोककथाएं और रहस्य
इस गांव से जुड़ी कई डरावनी कहानियां और रहस्यमयी लोककथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि यहां एक पौराणिक देवता की पूजा होती थी, जिसके आशीर्वाद और शाप दोनों से लोग डरते थे। गांव की सीमाओं के भीतर छिपे खजाने की दास्तानें भी सुनाई जाती हैं। यही वजह है कि इस गांव का नाम सुनते ही रोमांच और रहस्य से भरे डरावने किस्से याद आ जाते हैं। इन कहानियों से प्रेरित होकर ही मशहूर हिंदी फिल्म “तुम्बाड” (2018) बनाई गई थी, जिसने इस गांव को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
आस-पास के दर्शनीय स्थल
तुम्बाड से लगभग 100 किमी दूर स्थित कोयना वन्यजीव अभयारण्य जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित सह्याद्रि बाघ अभयारण्य का हिस्सा है और यहां बाघ, भारतीय बाइसन और अनेक दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त 12वीं शताब्दी का वासोटा किला और कोयना बाँध इतिहास व तकनीकी महत्व के प्रमुख आकर्षण हैं।
घूमने का सबसे अच्छा समय
तुम्बाड की सबसे बड़ी विशेषता इसका मानसूनी मौसम है। जून से सितंबर तक लगातार बरसने वाली बारिश गांव को रहस्यमयी और आकर्षक बना देती है। झरनों, घने जंगलों और पगडंडियों से घिरे इस क्षेत्र को ट्रैकिंग और नेचर वॉक के लिए आदर्श माना जाता है। वहीं सर्दियों का मौसम यहां घूमने के लिए सबसे सुखद समय होता है। दिसंबर-फरवरी का मौसम पर्यटन के लिहाज से सबसे उपयुक्त है। इस मौसम में तापमान 19 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है।
संस्कृति और व्यंजन
तुम्बाड का ग्रामीण जीवन इसकी संस्कृति और खानपान में झलकता है। यहां का पारंपरिक भोजन भाखरी और पिठला, साथ ही वांग्याचे भरीट और भरलेली वांगी जैसे बैंगन के व्यंजन स्थानीय स्वाद का असली परिचय कराते हैं। मीठे में मोदक यहां की लोकप्रिय डिश है, जो महाराष्ट्र के हर उत्सव का हिस्सा होती है।
तुम्बाड कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग से तुम्बाड गांव जाने के लिए कोल्हापुर का छत्रपति राजाराम महाराज हवाई अड्डा निकट है। यह गांव से लगभग 153 किमी दूर है। निकटतम रेलवे स्टेशन सतारा है, जिसकी गांव से दूरी करीब 50 किमी है। सड़क मार्ग से इस गांव में टैक्सी या अपने निजी वाहन से आ सकते हैं। पुणे से गांव की दूरी लगभग 100 किमी है।
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