Home›Khabar Junction›
West Asia Crisis Changes Demand Indian Cotton Yarn Rises In China And Bangladesh
वेस्ट एशिया संकट से बदली मांग : भारतीय सूती धागा की चीन-बांग्लादेश में बढ़ी डिमांड
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 18 Mar 2026 08:52 AM IST
सार
वैश्विक संकट के बीच भारतीय कॉटन यार्न को नया बाजार मिल रहा है। इससे न केवल निर्यात को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि किसानों और टेक्सटाइल उद्योग दोनों को फायदा होने की संभावना है।
सूती धागा
- फोटो : सोशल मीडिया
Link Copied
विस्तार
वेस्ट एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं का फायदा भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर को मिल रहा है। खासतौर पर भारतीय कॉटन यार्न (सूती धागा) की मांग चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों में तेजी से बढ़ी है, जिससे घरेलू बाजार में भी कीमतों में मजबूती देखने को मिल रही है।
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के अध्यक्ष विनय एन कोटक ने बिजनेस लाइन को बताया कि चीन से कॉटन यार्न की मांग काफी बढ़ गई है। वैश्विक लॉजिस्टिक्स में बाधा के कारण चीन द्वारा खरीदा गया कच्चा कपास समय पर नहीं पहुंच पा रहा है, इसलिए वहां के खरीदार तत्काल जरूरत पूरी करने के लिए भारत से कॉटन यार्न खरीद रहे हैं।
सप्लाई चेन बाधित, बढ़ा ट्रांजिट टाइम
सप्लाई चेन में व्यवधान के चलते कपास के आयात पर असर पड़ा है। माल ढुलाई (फ्रेट) की लागत बढ़ गई है और ट्रांजिट टाइम भी 10-15 दिन तक बढ़ गया है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
चीन ने बढ़ाया आयात कोटा
कपास की कमी को दूर करने के लिए चीन ने इस साल आयात कोटा बढ़ाकर 3 लाख टन कर दिया है, जो पिछले साल के मुकाबले 1 लाख टन अधिक है। यह कदम बाजार में सप्लाई को संतुलित करने के लिए उठाया गया है।
अन्य देशों से भी बढ़ी मांग
रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूंब के अनुसार, चीन के अलावा बांग्लादेश और वियतनाम से भी कॉटन यार्न की मांग मजबूत बनी हुई है। बढ़ती मांग के चलते यार्न की कीमतों में ₹10-15 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।
घरेलू बाजार में भी तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार के असर से भारत में भी कपास की कीमतों में सुधार देखा जा रहा है। ICE पर कॉटन फ्यूचर्स 68.78 सेंट प्रति पाउंड के आसपास पहुंच गए हैं, जो पिछले दो हफ्तों में 13% की वृद्धि दर्शाते हैं। वहीं, कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने भी कीमतों में पिछले दो दिनों में ₹1,200 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की है।
कपास खपत का अनुमान बढ़ा
बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए CAI ने घरेलू खपत का अनुमान 305 लाख गांठ से बढ़ाकर 315 लाख गांठ कर दिया है (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम की) .वैश्विक संकट के बीच भारतीय कॉटन यार्न को नया बाजार मिल रहा है। इससे न केवल निर्यात को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि किसानों और टेक्सटाइल उद्योग दोनों को फायदा होने की संभावना है।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।