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Climate Change का खतरा बढ़ा : भारत की खेती और फूड सप्लाई पर संकट, तुरंत बदलाव की जरूरत- विशेषज्ञ

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 27 May 2026 10:19 AM IST
सार

देश में बढ़ती गर्मी, अनिश्चित मानसून और भूजल की कमी फूड सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा बन रही है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए किसानों से लेकर कंपनियों और सरकार तक सभी को मिलकर काम करना होगा।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का असर अब सीधे भारत की खेती और फूड सप्लाई चेन पर दिखने लगा है। बढ़ती गर्मी, अनियमित मानसून और भूजल संकट के चलते कृषि क्षेत्र के सामने बड़ा खतरा खड़ा हो गया है। बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रमुख क्लाइमेट संगठन ने चेतावनी दी है कि भारत के कृषि और फूड सेक्टर को जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से निपटने के लिए तेजी से बदलाव करने होंगे।

क्लाइमेट ग्रुप की इंडिया एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर दिव्या शर्मा के अनुसार, देश में बढ़ती गर्मी, अनिश्चित मानसून और भूजल की कमी फूड सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा बन रही है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए किसानों से लेकर कंपनियों और सरकार तक सभी को मिलकर काम करना होगा।

इस दिशा में एक इंडस्ट्री-आधारित गठबंधन भी बनाया जा रहा है, जिसका मकसद पोषण से भरपूर, कम प्रदूषण वाले और टिकाऊ फूड प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देना है। Climate Risk Index (CRI) के मुताबिक, भारत जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में 9वें स्थान पर है, जो इस खतरे की गंभीरता को दिखाता है।

हालांकि, भारत ने रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में अच्छा काम किया है। देश 2030 तक 500 गीगावॉट बिजली रिन्यूएबल स्रोतों से हासिल करने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। भारत ने इंटरनेशनल सोलर एलायंस और डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे वैश्विक प्रयासों में भी अहम भूमिका निभाई है।

इसके बावजूद, स्टील और कंक्रीट जैसे उद्योगों में प्रदूषण कम करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि देश में विकास और उत्पादन की मांग तेजी से बढ़ रही है। दिव्या शर्मा ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए भारत के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को कम कार्बन (Decarbonisation) की दिशा में ले जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत 2070 से पहले Net Zero का लक्ष्य हासिल कर सकता है।