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महाराष्ट्र : किसानों का ₹4898 करोड़ बकाया, ISMA ने की चीनी पर MSP बढ़ाने की मांग

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 18 Mar 2026 09:15 AM IST
सार

देश में 2025-26 सीजन में अब तक 26.21 मिलियन टन (एमटी) चीनी उत्पादन हो चुका है, जो पिछले साल की समान अवधि के 23.72 एमटी से 10.5% ज्यादा है। यह उत्पादन पिछले पूरे सीजन (2024-25) के कुल 26.12 एमटी से भी अधिक है।
 

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार

महाराष्ट्र में गन्ना किसानों का भुगतान संकट गहराता जा रहा है। मौजूदा सीजन में 28 फरवरी 2026 तक किसानों का ₹4,898 करोड़ बकाया रह गया है, जिससे चीनी मिलों पर दबाव बढ़ा है। उद्योग संगठन ISMA ने सरकार से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में जल्द बढ़ोतरी की मांग की है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, पिछले साल इसी अवधि में यह बकाया ₹2,949 करोड़ था, जो इस साल बढ़कर ₹4,898 करोड़ हो गया है। गन्ना किसानों को 14 दिनों के भीतर भुगतान नहीं हो पाने से यह स्थिति बनी है।

MSP बढ़ाने की मांग क्यों?
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, ISMA का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ रही है, जबकि मिलों को मिलने वाली कीमत (एक्स-मिल रियलाइजेशन) कम है। इससे मिलों पर नकदी संकट बढ़ रहा है और किसानों का भुगतान अटक रहा है। ऐसे में MSP बढ़ाना जरूरी है, ताकि मिलों की स्थिति सुधरे और किसानों को समय पर भुगतान हो सके।

चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी
देश में 2025-26 सीजन में अब तक 26.21 मिलियन टन (एमटी) चीनी उत्पादन हो चुका है, जो पिछले साल की समान अवधि के 23.72 एमटी से 10.5% ज्यादा है। यह उत्पादन पिछले पूरे सीजन (2024-25) के कुल 26.12 एमटी से भी अधिक है।

157 मिलें अभी भी चालू
15 मार्च तक देश में 157 चीनी मिलें संचालन में हैं, जबकि 379 मिलों ने अपना काम बंद कर दिया है।

राज्यवार उत्पादन स्थिति
  • महाराष्ट्र : 9.84 मिलियन टन (पिछले साल 7.87 एमटी)
  • उत्तर प्रदेश : 8.13 मिलियन टन (लगभग स्थिर)
  • कर्नाटक : 4.60 मिलियन टन (पिछले साल 3.92 एमटी)

आगे क्या उम्मीद
ISMA के मुताबिक, दक्षिण कर्नाटक की कुछ मिलें जून-जुलाई से सितंबर 2026 के विशेष सीजन में फिर से संचालन शुरू कर सकती हैं। बढ़ते बकाया और लागत के दबाव के बीच चीनी उद्योग MSP बढ़ाने की मांग कर रहा है। यदि समय पर फैसला नहीं हुआ, तो इसका असर किसानों की आय और बाजार की स्थिरता दोनों पर पड़ सकता है।