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रसोई से प्रसंस्करण तक सुपरहिट : आलू की नई किस्में तैयार, होगी बंपर पैदावार, मिलेगी गुणवत्ता वाली फसल

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 20 Sep 2025 03:56 PM IST
सार

आईसीएआर-सीपीआरआई, शिमला द्वारा विकसित आलू की चार नई किस्मों को बीज उत्पादन और खेती के लिए अधिसूचित किया गया है। ये किस्में हरियाणा, पंजाब, यूपी, उत्तराखंड, एमपी, राजस्थान में खेती के लिए उपयुक्त हैं। 
 

सुपरहिट आलू की नई किस्में तैयार
सुपरहिट आलू की नई किस्में तैयार - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आईसीएआर-सीपीआरआई, शिमला द्वारा विकसित आलू की चार नई किस्मों को बीज उत्पादन और खेती के लिए अधिसूचित किया गया है। इन किस्मों का उद्देश्य किसानों को अधिक उपज और बेहतर गुणवत्ता वाली आलू की फसल उपलब्ध कराना है। ये किस्में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों में खेती के लिए उपयुक्त मानी गई हैं।

सबसे पहले बात करें कुफरी रतन की, जो लाल छिलके वाली किस्म है और लगभग 90 दिनों में तैयार हो जाती है। यह किस्म प्रति हेक्टेयर 37-39 टन उपज देती है और मुख्य तौर पर रसोई और घरेलू उपयोग के लिए उत्तम मानी जाती है। वहीं, गर्मी सहन करने में सक्षम कुफरी तेजस की किस्म प्रति हेक्टेयर 37-40 टन उपज देती है और यह प्रारंभिक तथा मुख्य मौसम में खेती के लिए उपयुक्त है। इसकी विशेषता यह है कि यह उच्च तापमान में भी अच्छी उपज देती है।

प्रोसेसिंग और फ्रोजन आलू उत्पादों के लिए कुफरी चिपभारत-1 और कुफरी चिपभारत-2 किस्मों को विकसित किया गया है। कुफरी चिपभारत-1 100 दिनों में तैयार होकर प्रति हेक्टेयर 35-38 टन उपज देती है, जबकि कुफरी चिपभारत-2 90 दिनों में तैयार होकर प्रति हेक्टेयर 35-37 टन उपज देती है। इन किस्मों का उपयोग आलू के चिप्स, फ्रेंच फ्राइज और अन्य प्रसंस्कृत उत्पादों में किया जा सकता है।

आईसीएआर-सीपीआरआई के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह के अनुसार, “देश की 94% से अधिक आलू की खेती इन नई किस्मों से कवर की जा सकती है। इससे भारत की स्थिति विश्व के प्रमुख आलू उत्पादक के रूप में और अधिक मजबूत होगी। किसानों को अधिक लाभ मिलेगा और आलू का बाजार स्थिर होगा।”

इन नई किस्मों के माध्यम से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि आलू की गुणवत्ता और उपलब्धता में भी सुधार होगा। किसान इन किस्मों को अपनाकर अपनी खेती को लाभकारी और टिकाऊ बना सकते हैं। इस तरह, आईसीएआर-सीपीआरआई की ये पहल भारत में आलू उत्पादन और प्रसंस्करण क्षेत्र में एक नया मुकाम स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

किसानों के लिए क्या हैं लाभ?
  • उच्च उपज और बेहतर गुणवत्ता
  • रसोई और प्रोसेसिंग दोनों के लिए उपयुक्त
  • गर्मी सहन करने वाली किस्में
  • घरेलू और निर्यात बाजार में नई संभावनाएँ
इस पहल से आलू किसानों के लिए फसल सुरक्षा, बाजार स्थिरता और आय के नए अवसर खुलेंगे।