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इस्राइल-अमेरिका और ईरान युद्ध का असर : खरीफ से पहले यूरिया सप्लाई पर संकट, बढ़ सकती हैं कीमतें

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 18 Mar 2026 08:29 AM IST
सार

वैश्विक हालात का असर भारत के कृषि इनपुट पर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में सरकार और उद्योग के लिए चुनौती है कि किसानों को समय पर और उचित कीमत पर उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं, ताकि खरीफ उत्पादन प्रभावित न हो।

यूरिया का छिड़काव
यूरिया का छिड़काव - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ईरान में जारी संघर्ष और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के कृषि क्षेत्र पर भी पड़ने लगा है। खासतौर पर खरीफ सीजन से पहले देश में यूरिया की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिससे किसानों की लागत और सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है। खरीफ सीजन, जो देश के कुल कृषि उत्पादन का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा है, उसके लिए यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। लेकिन ईरान संकट के चलते गैस आपूर्ति में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे यूरिया उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

महंगा हो सकता है उर्वरक
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल भारत को यूरिया और अन्य उर्वरकों के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसका सीधा असर किसानों की उत्पादन लागत पर पड़ेगा और सरकार की सब्सिडी खर्च भी बढ़ सकता है। सरकार खरीफ सीजन में उर्वरकों की कमी न हो, इसके लिए पूरी कोशिश कर रही है। सहकारी संस्थाएं जैसे IFFCO, KRIBHCO और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NFL को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

गैस सप्लाई बनी चुनौती
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के एक पूर्व अधिकारी के अनुसार, यूरिया उत्पादन पूरी तरह गैस की उपलब्धता पर निर्भर करता है। मौजूदा हालात में गैस सप्लाई अस्थिर बनी हुई है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

अमोनिया का पूरा उपयोग यूरिया में
सरकार ने उर्वरक कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे उत्पादित अमोनिया का पूरा उपयोग केवल यूरिया उत्पादन में करें। इससे कुछ हद तक अतिरिक्त उत्पादन संभव हो सकेगा और आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी। वैश्विक हालात का असर भारत के कृषि इनपुट पर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में सरकार और उद्योग के लिए चुनौती है कि किसानों को समय पर और उचित कीमत पर उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं, ताकि खरीफ उत्पादन प्रभावित न हो।