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Frost Hits Tea Gardens In Munnar And Nilgiris Production Likely To Take A Major Hit
Tea Production: मुन्नार और नीलगिरि की चाय बागानों में पाला, उत्पादन पर गहरा असर पड़ने की आशंका
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Wed, 24 Dec 2025 08:05 AM IST
सार
हैरिसन्स मलयालम लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट (टी ऑपरेशंस) अनिल जॉर्ज ने बताया कि मुन्नार के लॉकहार्ट एस्टेट और आसपास के अन्य चाय बागानों में भीषण पाला पड़ा है।
चाय बागान
- फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
दक्षिण भारत के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों केरल के मुन्नार और तमिलनाडु के नीलगिरि में तापमान में अचानक आई तेज गिरावट ने चाय उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। बीते कुछ दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड और पाले (फ्रॉस्ट) के कारण चाय की झाड़ियों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे आने वाले महीनों में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह असर सिर्फ बड़े एस्टेट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे चाय उत्पादकों की आय पर भी सीधा खतरा बनकर सामने आया है।
मुन्नार में सबसे ज्यादा नुकसान
मुन्नार क्षेत्र में तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। UPASI टी रिसर्च फाउंडेशन के आंकड़ों के मुताबिक, चेंदुवरई, साइलेंट वैली, लेचमी, देविकुलम और नल्लाथन्नी (देविकुलम स्थित UPASI मुख्यालय) में तापमान 0 से 1 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। चाय उत्पादन से जुड़ी एक कंपनी के सूत्रों के अनुसार, केवल मुन्नार क्षेत्र में करीब 100 हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ है। इसका असर अगले तीन महीनों तक उत्पादन पर पड़ सकता है।
लॉकहार्ट एस्टेट में गंभीर स्थिति
हैरिसन्स मलयालम लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट (टी ऑपरेशंस) अनिल जॉर्ज ने बताया कि मुन्नार के लॉकहार्ट एस्टेट और आसपास के अन्य चाय बागानों में भीषण पाला पड़ा है। लॉकहार्ट एस्टेट समुद्र तल से करीब 6,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां तापमान शून्य से नीचे चला गया। अकेले लॉकहार्ट एस्टेट में 49.04 हेक्टेयर, यानी लगभग 14.3 फीसदी क्षेत्र पाले से प्रभावित हुआ है। पाले के कारण चाय की झाड़ियों पर भारी दबाव पड़ा है और पत्तियों का झड़ना (डिफोलिएशन) शुरू हो गया है। इससे उत्पादन में सीधी गिरावट तय मानी जा रही है।
रिकवरी मौसम पर निर्भर
अनिल जॉर्ज के अनुसार, फसल की रिकवरी पूरी तरह मौसम पर निर्भर करेगी।
तापमान में बढ़ोतरी
हवा में नमी
और समय पर बारिश
अगर ये स्थितियां अनुकूल रहीं, तभी चाय की झाड़ियां धीरे-धीरे उबर पाएंगी।
दो मौसमी घटनाएं बनीं बड़ी वजह
विशेषज्ञों ने इस असामान्य ठंड के पीछे दो प्रमुख मौसमी घटनाओं को जिम्मेदार बताया है:
1. साइबेरियन हाई (Siberian High)
आमतौर पर साइबेरिया से आने वाली ठंडी हवाएं हिमालय तक सीमित रहती हैं, लेकिन इस साल जलवायु परिवर्तन के कारण ये हवाएं दक्षिण भारत तक पहुंच गईं।
2. कटाबैटिक फ्लो (Katabatic Flow)
रात के समय ऊंचाई वाले इलाकों की ठंडी और भारी हवा घाटियों की ओर बहने लगती है। इसी प्रक्रिया के कारण चाय बागानों में तेज पाला पड़ा और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक नुकसान हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह दक्षिण भारत के चाय उत्पादक इलाकों में जलवायु परिवर्तन का एक और स्पष्ट संकेत है।
नीलगिरि में भी हालात चिंताजनक
तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। ऊटी (उधगमंडलम), कोटागिरी और अन्य आंतरिक इलाकों में पाले की स्थिति बनी हुई है। नीलगिरि बॉट टी लीफ मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष धनंजयन कृष्णमूर्ति के अनुसार, यहां अधिकांश चाय बागान छोटे किसानों के पास हैं। तापमान में गिरावट सीधे तौर पर उनकी आमदनी को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि अभी नुकसान का पूरा आकलन करना जल्दबाजी होगी और असली असर अगले एक-दो हफ्तों में साफ होगा।
चाय उद्योग पर व्यापक असर
उद्योग सूत्रों के अनुसार, केरल में सालाना चाय उत्पादन करीब 6.4 करोड़ किलोग्राम है। इसमें से करीब 25 फीसदी योगदान अकेले मुन्नार क्षेत्र का है। ऐसे में मुन्नार और नीलगिरि में पाले का असर न सिर्फ स्थानीय किसानों, बल्कि पूरे दक्षिण भारतीय चाय उद्योग के लिए चिंता का विषय बन गया है।
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