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चीन ने दोबारा ठुकराई भारतीय चावल की खेप : GMO आरोप लगाकर शिपमेंट किया खारिज, भारत ने किया इंकार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 27 May 2026 09:34 AM IST
सार

भारत के non-basmati rice निर्यात पर चीन के लगातार आरोपों ने नई चिंता खड़ी कर दी है। चीन भारतीय चावल की खेप को ‘GMOs’ यानी जेनेटिकली मॉडिफाइड होने का हवाला देकर लौटा रहा है, जबकि भारत सरकार साफ कर चुकी है कि देश में GM चावल की खेती नहीं होती।
 

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चीन लगातार भारत से भेजे जा रहे non-basmati चावल को वापस कर रहा है। उसका आरोप है कि इन चावल में GMOs (जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म) मौजूद हैं। लेकिन भारत सरकार और वैज्ञानिक संस्थान साफ कह चुके हैं कि देश में GM चावल की खेती नहीं होती। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में चीन ने 4-5 नई खेप भी इसी आरोप में ठुकरा दी। इससे पहले मार्च में भी 3 शिपमेंट वापस कर दी गई थीं। अब तक करीब 70 भारतीय चावल की खेप चीन द्वारा रिजेक्ट की जा चुकी हैं।

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार के अधिकारियों का कहना है कि चीन जानबूझकर भारत की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है। खास बात यह है कि चीन खुद GM चावल उगाता है, लेकिन भारत पर ऐसे आरोप लगा रहा है।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने 30 अप्रैल को साफ किया कि देश में किसी भी GM चावल को मंजूरी नहीं दी गई है। वहीं, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने भी पुष्टि की है कि भारत में GM rice की खेती नहीं होती। इन घटनाओं का असर अब व्यापार पर भी दिखने लगा है। कई निर्यातकों ने लगभग 200 कंटेनर चावल की शिपमेंट रोक दी है। वहीं, मार्च में चीन ने 3 भारतीय कंपनियों के इंपोर्ट लाइसेंस भी सस्पेंड कर दिए थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक सामान्य मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी रणनीति हो सकती है। कुछ ट्रेडर्स का कहना है कि चीन भारत की वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को कमजोर करना चाहता है, जबकि कुछ का मानना है कि यह कदम भविष्य की व्यापार वार्ताओं में दबाव बनाने के लिए उठाया जा रहा है। भारत और चीन के अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत भी हुई है, लेकिन चीन अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि वह किस आधार पर चावल को GM बता रहा है।