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पंजाब चुनाव से पहले किसान मुद्दों पर सक्रिय BJP: हरियाणा CM सैनी ने किसान संगठनों से की अहम बैठक

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 27 May 2026 10:33 AM IST
सार

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को अपने आधिकारिक आवास पर पंजाब के विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
 

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले किसान मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गए हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के किसान संगठनों के नेताओं के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि BJP सरकार बनने पर इनका समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को अपने आधिकारिक आवास पर पंजाब के विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में दोआबा किसान यूनियन, किसान बचाओ मोर्चा और कम्बोज समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। इन नेताओं ने पंजाब के किसानों की मौजूदा समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा और उनके दीर्घकालिक समाधान की मांग की।

सरकारी बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री सैनी ने किसानों को आश्वासन दिया कि पंजाब में BJP की सरकार बनने के बाद कृषि और किसानों से जुड़े सभी मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं, ऐसे में इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा से किसानों के कल्याण को अपनी नीतियों का केंद्र मानती रही है। उन्होंने हरियाणा का उदाहरण देते हुए बताया कि राज्य में किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल नुकसान होने पर किसानों को मुआवजा भी दिया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

इस बैठक को पंजाब के किसानों के बीच पहुंच बनाने और उनकी समस्याओं को समझने की एक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले चुनावों के मद्देनजर, किसान मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक एजेंडे में प्रमुख स्थान लेते नजर आ रहे हैं।