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भारत में 44000 से ज्यादा एफपीओ : किसान उत्पादक संगठनों की संख्या बढ़ी, पर सफलता नदारद

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 10 Sep 2025 09:15 AM IST
सार

भारत में 44,000 से ज्यादा किसान उत्पादक संगठन (FPO) पंजीकृत हैं, लेकिन इन्हें वित्तीय सहायता, कुशल कर्मचारियों और पूंजी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र की 10,000 FPO योजना ने 10,099 संगठनों को समर्थन दिया, मगर कई FPO निष्क्रिय हैं, जिन्हें मजबूत करने की जरूरत है।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में 10,000 एफपीओ योजना शुरू की थी।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में 10,000 एफपीओ योजना शुरू की थी। - फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार

भारत में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की संख्या बढ़कर 44,000 से ज्यादा हो गई है, लेकिन इनके सामने कई चुनौतियां हैं। हाल ही में नाबार्ड और समुन्नति द्वारा आयोजित FPO कॉन्क्लेव में जारी 'स्टेट ऑफ द सेक्टर रिपोर्ट 2025' में इन चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा हुई।

एफपीओ की बढ़ती ताकत
केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में 10,000 एफपीओ योजना शुरू की थी, जिसके तहत 10,099 एफपीओ को नाबार्ड और नेफेड जैसे संगठनों से नीतिगत और संस्थागत समर्थन मिला। ये संगठन किसानों को एकजुट करके उनकी उपज और सेवाओं के लिए बेहतर कीमत दिलाने में मदद कर रहे हैं। एफपीओ ने किसानों को सशक्त किया है, क्योंकि वे बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सामूहिक ताकत हासिल करते हैं।

चुनौतियां और कमियां
ज्यादातर FPOs को कुशल कर्मचारियों, संस्थागत ऋण और इक्विटी पूंजी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। नेशनल एसोसिएशन फॉर फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (NAFPO) के स्टीयरिंग कमेटी के अध्यक्ष परवेश शर्मा ने कहा, “कई FPO असफल हुए या संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। हर क्षेत्र में असफलताएं होती हैं।”

वित्तीय सहायता का योगदान
समुन्नति ने 3,603 FPO को 3,272 करोड़ रुपये का वित्तीय समर्थन दिया, जबकि नाबार्ड द्वारा प्रायोजित नाबकिसान फाइनेंस लिमिटेड ने 1,700 से ज्यादा FPO की मदद की। रिपोर्ट में कहा गया कि FPOs को मजबूत करने के लिए दोतरफा रणनीति चाहिए। पहला, FPO को संस्थागत रूप से मजबूत करना, और दूसरा, संगठनात्मक स्थिरता के लिए तंत्र विकसित करना।

FPO का असमान वितरण
देश भर में FPO का वितरण एक समान नहीं है। एक-तिहाई FPO महाराष्ट्र में हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में 6,524 FPO हैं। इसका मतलब है कि FPO आंदोलन देश के हर हिस्से में समान रूप से नहीं फैला। इक्विटी पूंजी की कमी भी बड़ी समस्या है। रिपोर्ट के अनुसार, केवल 387 FPOs के पास 15 लाख रुपये से ज्यादा की पेड-अप पूंजी है।

इक्विटी पूंजी की जरूरत
सह्याद्री फार्म्स के चेयरमैन विलास शिंदे ने कहा, “किसानों को इक्विटी पूंजी में योगदान देना चाहिए। इसे अपनी खेती में निवेश की तरह देखना चाहिए। इससे FPO बुनियादी ढांचा बना सकते हैं, जिससे अतिरिक्त आय होगी।”

निष्क्रिय FPO और शासन की चुनौतियां
रिपोर्ट में बताया गया कि कई FPO रजिस्ट्रेशन के बाद निष्क्रिय हो गए। इसके पीछे कमजोर शासन, पूंजी की कमी और व्यवसाय के अवसरों की कमी जैसे कारण हैं। रिटर्न फाइल करना, सालाना बैठकें करना और रिकॉर्ड रखना भी कई FPO के लिए चुनौती है, क्योंकि उनके पास प्रशिक्षित कर्मचारी या समर्थन सिस्टम नहीं हैं।