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Vitamin D And B12 Deficiency Alarming Among Women And Children In Shimla Experts Recommend Sunlight And Diet Changes
Report: पहाड़ों पर महिलाओं और बच्चों में विटामिन D और B12 की कमी गंभीर, विशेषज्ञों ने दी ये सलाह
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Thu, 25 Sep 2025 12:14 PM IST
सार
विटामिन D की कमी से अवसाद (डिप्रेशन) जैसी मानसिक समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ठंडे क्षेत्रों में कपड़े अधिक पहनने और धूप से त्वचा के कम संपर्क के कारण ये दिक्कतें और बढ़ जाती हैं।
विटामिन D और B12 की खतरनाक कमी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में लोगों की सेहत को एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। खासकर महिलाओं और बच्चों में विटामिन D और विटामिन B12 की भारी कमी लगातार सामने आ रही है। शिमला, कांगड़ा और अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सूरज की रोशनी की सीमित उपलब्धता और बदलती जीवनशैली के कारण लोग प्राकृतिक धूप से दूर हो रहे हैं। यही विटामिन D की कमी का मुख्य कारण बन रहा है। इसके साथ ही खानपान में दूध, मछली, अंडे, हरी सब्जियां और कैल्शियम युक्त आहार की कमी से यह स्थिति और गंभीर हो रही है।
क्यों खतरनाक है ये कमी?
विटामिन D की कमी से बच्चों में रिकेट्स (हड्डियां टेढ़ी होना), मांसपेशियों में दर्द, थकावट, फ्रैक्चर और बड़ों में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा रहता है।
विटामिन B12 की कमी से शरीर में खून की कमी (एनीमिया), न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, झनझनाहट, चिड़चिड़ापन, याददाश्त कमजोर होना और गर्भस्थ शिशु के विकास में रुकावट हो सकती है।
अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली स्थिति
शिमला के सरकारी स्कूलों में एक अध्ययन के मुताबिक 93% से ज्यादा बच्चे विटामिन D की कमी से ग्रसित पाए गए। कमला नेहरू अस्पताल शिमला के एक शोध में 94% गर्भवती महिलाएं इस कमी से प्रभावित पाई गईं। कांगड़ा और शिमला जिलों में किए गए अन्य अध्ययनों में पता चला कि करीब 50% से अधिक कुपोषित बच्चे और महिलाएं विटामिन B12 की गंभीर कमी झेल रहे हैं।
विशेषज्ञों का क्या कहना है?
शिमला के तेंजिन अस्पताल के एमएस डॉ. रमेश चंद कहते हैं, "लोगों को हर रोज कम से कम 20 से 30 मिनट धूप में बिताना चाहिए। खाने में दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली, हरी सब्जियां और सोया उत्पाद शामिल करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से विटामिन D और B12 की गोलियां, सिरप या इंजेक्शन लिए जा सकते हैं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों की नियमित जांच जरूरी है।"
उन्होंने यह भी बताया कि विटामिन D की कमी से अवसाद (डिप्रेशन) जैसी मानसिक समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ठंडे क्षेत्रों में कपड़े अधिक पहनने और धूप से त्वचा के कम संपर्क के कारण ये दिक्कतें और बढ़ जाती हैं।
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