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Epilepsy Cases: बच्चों में तेजी से बढ़ रही मिर्गी की बीमारी, जानें शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Mon, 22 Sep 2025 10:41 AM IST
सार

विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षण पहचानकर समय पर इलाज कराने से बच्चे को सामान्य जीवन दिया जा सकता है। इसलिए माता-पिता को लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और यदि बच्चे में ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

मिर्गी
मिर्गी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

माता-पिता के लिए चिंता की खबर है। अस्पतालों में मिर्गी के दौरे से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर दिन यहां 100 से 500 नए बच्चे दौरे की समस्या के बाद इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सक मानते हैं कि समय पर इलाज और शुरुआती लक्षणों की पहचान न होने से यह बीमारी गंभीर रूप ले रही है।

डॉक्टरों ने जताई चिंता
मथुरा के महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि नवजातों और छोटे बच्चों में मिर्गी के दौरे की समस्या कई कारणों से हो सकती है।
  • जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी
  • प्रसव के दौरान सिर में चोट या रक्तस्राव
  • संक्रमण
  • या कोई जन्मजात रोग

इन वजहों से बच्चों को मिर्गी का खतरा बढ़ जाता है। अक्सर तीन, छह या नौ महीने की उम्र में इसके लक्षण सामने आते हैं, लेकिन माता-पिता शुरुआती संकेतों को पहचान नहीं पाते, जिससे बीमारी भयानक हो जाती है।

कैसे पहचानें बच्चे में दौरे की समस्या?
सामान्य बच्चा तीन माह में गर्दन संभाल लेता है और छह माह तक करवट बदल लेता है। मिर्गी से पीड़ित बच्चा गर्दन संभाल नहीं पाता। दौरे के समय गर्दन टेढ़ी हो जाती है। आंखें ऊपर चढ़ जाती हैं, मुंह से लार आने लगती है। बच्चा लगातार एक ही दिशा में घूरता रहता है। अचानक उसके व्यवहार में बदलाव आ जाता है। कई बार सुबह उठते समय या नींद के दौरान भी दौरे पड़ सकते हैं।

डॉक्टरों की सलाह 
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षण पहचानकर समय पर इलाज कराने से बच्चे को सामान्य जीवन दिया जा सकता है। इसलिए माता-पिता को लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और यदि बच्चे में ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।