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Bird Flu: फिर बर्ड फ्लू ने दिया दस्तक, इन इलाकों में हुई पुष्टि, पोल्ट्री किसानों में हड़कंप

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Wed, 24 Dec 2025 07:58 AM IST
सार

ब्रॉयलर उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि इसका असर सीमित इलाकों तक ही रहेगा। स्थिति लंबे समय तक कारोबार को प्रभावित करने वाली नहीं है। फिर भी, त्योहारों के मौसम में अनिश्चितता के चलते किसान और व्यापारी सतर्क हैं।

बर्ड फ्लू
बर्ड फ्लू - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केरल में क्रिसमस और नए साल के त्योहार से ठीक पहले पोल्ट्री सेक्टर के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। राज्य के अलप्पुझा और कोट्टायम जिलों के कई इलाकों में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) की पुष्टि हुई है। केंद्र की उच्च सुरक्षा प्रयोगशाला में जांच के बाद संक्रमण की पुष्टि होने से प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। हालांकि फिलहाल पोल्ट्री मांस के सेवन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में सख्त निगरानी और नियंत्रण उपाय शुरू कर दिए गए हैं।

कहां-कहां मिला संक्रमण
पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, भोपाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई-सिक्योरिटी एनिमल डिजीज़ (NIHSAD) में कराई गई जांच में हाईली पैथोजेनिक एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस की पुष्टि हुई है। अलप्पुझा जिला अलप्पुझा जिले की आठ पंचायतों के एक-एक वार्ड में संक्रमण की पुष्टि हुई है। प्रभावित पंचायतें हैं:
  • नेदुमुडी
  • चेरुथाना
  • करुवट्टा
  • कार्तिकप्पल्ली
  • अंबलापुझा साउथ
  • पुन्नाप्रा साउथ
  • थकाझी
  • पुरक्कड़
यहां नेदुमुडी में मुर्गियों में संक्रमण पाया गया है, जबकि बाकी इलाकों में बतखें (डक) संक्रमित मिली हैं।

कोट्टायम जिले के चार गांवों में बर्ड फ्लू के मामले सामने आए हैं:
  • कुरुप्पंथरा
  • मंजूर
  • कल्लुपुरक्कल
  • वेलूर

इन इलाकों में बटेर (क्वेल) और मुर्गियां संक्रमित पाई गई हैं।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
पशुपालन मंत्री जे. चिंचुरानी ने बताया कि एक सप्ताह पहले संक्रमण की आशंका सामने आने के बाद नमूने एकत्र कर केंद्रीय प्रयोगशाला भेजे गए थे। रिपोर्ट आने के बाद अब प्रकोप की गंभीरता का आकलन किया जा रहा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अभी तक पोल्ट्री मांस के सेवन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए केंद्र सरकार की 2021 की संशोधित गाइडलाइंस के अनुसार कदम उठाए जाएंगे। प्रारंभिक आकलन में माना जा रहा है कि प्रवासी पक्षियों (Migratory Birds) के जरिए यह संक्रमण फैला है। पिछले वर्ष भी अलप्पुझा, कोट्टायम और पथानामथिट्टा जिलों में इसी तरह के मामले सामने आए थे।

10 किलोमीटर के दायरे में सख्त पाबंदी
अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित इलाकों के 10 किलोमीटर के दायरे में मुर्गी, बतख, बटेर और अन्य घरेलू पक्षियों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर संक्रमित और संदिग्ध पक्षियों को नष्ट (कुलिंग) किया जाएगा। आसपास के स्थानीय निकायों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

किसानों पर असर, त्योहारों से पहले चिंता
केरल वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी के पूर्व निदेशक टी. पी. सेतुमाधवन के मुताबिक, यह प्रकोप ऐसे समय में सामने आया है जब पोल्ट्री किसान पहले से ही लागत निकालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। क्रिसमस और न्यू ईयर के दौरान केरल में पोल्ट्री मांस की मांग तेज रहती है। राज्य में सामान्य तौर पर हर हफ्ते करीब 1 करोड़ किलो चिकन की खपत होती है। पिछले पांच वर्षों में बर्ड फ्लू के कारण कुट्टनाड क्षेत्र में बतख पालन को भारी नुकसान हुआ है। बतख पालन खुले वातावरण में होने के कारण, आधुनिक बंद शेड में होने वाले पोल्ट्री फार्म की तुलना में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।

ब्रॉयलर उद्योग का क्या कहना है
ब्रॉयलर उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि इसका असर सीमित इलाकों तक ही रहेगा। स्थिति लंबे समय तक कारोबार को प्रभावित करने वाली नहीं है। फिर भी, त्योहारों के मौसम में अनिश्चितता के चलते किसान और व्यापारी सतर्क हैं।