Home›Sehat Tola›
Post Covid Surge In Eye Problems Among Children In Himachal 48 Rise In 4 Years Screen Time Major Culprit
कोरोना के बाद बच्चों की आंखें कमजोर: 4 साल में 48% बढ़े नेत्र रोगी, 2050 तक 50 फीसदी बच्चों को लग जाएगा चश्मा
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Sun, 31 Aug 2025 02:25 PM IST
सार
आईजीएमसी शिमला के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राम लाल शर्मा के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों की दृष्टि पर सीधा असर हो रहा है। यदि यही रफ्तार जारी रही तो 2050 तक आधे बच्चे चश्मे पर निर्भर हो जाएंगे।
बच्चों की आंखें हो रहीं कमजोर
- फोटो : सोशल मीडिया
Link Copied
विस्तार
बच्चों की आंखों की सेहत पर कोरोना महामारी का गहरा असर देखने को मिल रहा है। हिमाचल प्रदेश से एक हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। यहां आईजीएमसी शिमला के नेत्र रोग विभाग के अनुसार, महामारी से पहले जहां रोजाना 20-25 बच्चे आंखों की जांच के लिए आते थे, अब यह संख्या बढ़कर 40-50 हो चुकी है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2018 में 3967 बच्चे (18 साल से कम आयु) आंखों की जांच के लिए अस्पताल पहुंचे थे। यह संख्या 2022 में 5877 और 2023 में 7262 हो गई। यानी चार साल में लगभग 48% की बढ़ोतरी और 2018 की तुलना में 83% ज्यादा मरीज। यह संकेत है कि कोविडकाल के बाद बच्चों में आंखों की बीमारियां तेज़ी से बढ़ रही हैं।
स्क्रीन टाइम बना बड़ी वजह
महामारी से पहले बच्चे औसतन 3.5 घंटे स्क्रीन (मोबाइल, टीवी, लैपटॉप) पर बिताते थे। अब यह बढ़कर 8 घंटे प्रतिदिन तक पहुंच गया है। इसी वजह से मायोपिया यानी नजदीक की नज़र कमजोर होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
रिसर्च क्या कहती है?
केरल जर्नल ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी (2023): महामारी में बच्चों का औसत स्क्रीन टाइम 4 घंटे प्रतिदिन से ज्यादा पाया गया।
इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी (2022): जिन बच्चों को रोज केवल 1 घंटा धूप मिलती थी और जो 1 घंटे से ज्यादा मोबाइल गेम खेलते थे, उनमें मायोपिया का खतरा 3 गुना ज्यादा पाया गया।
नॉर्थ इंडिया मायोपिया रूरल स्टडी (2022): ग्रामीण बच्चों में मायोपिया की दर 6.4% रही, लेकिन जो बच्चे ज्यादा समय बाहर खेलते थे, उनमें यह खतरा बेहद कम था।
फ्रंटियर्स इन पब्लिक हेल्थ (2025): माता-पिता का स्क्रीन टाइम सीधे बच्चों पर असर डालता है।
क्या है मायोपिया?
मायोपिया यानी नजदीक की चीजें साफ और दूर की धुंधली दिखना। यह समस्या आंख का आकार लंबा होने या कॉर्निया की वक्रता बढ़ने से होती है। आमतौर पर यह 5-7 साल की उम्र में शुरू हो सकती है। बच्चों को जल्दी ही चश्मे की ज़रूरत पड़ सकती है। इसका प्रमुख कारण मोबाइल/कंप्यूटर का ज्यादा उपयोग, कम रोशनी में पढ़ना, धूप में खेलों की कमी।
रोकथाम कैसे करें?
बच्चों को रोजाना 1-2 घंटे धूप में खेलने दें।
पढ़ाई या स्क्रीन टाइम के दौरान 20-20-20 नियम अपनाएं (हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें)।
सही रोशनी और बैठने की मुद्रा का ध्यान रखें।
नियमित नेत्र जांच करवाएं।
विशेषज्ञ की चेतावनी
आईजीएमसी शिमला के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राम लाल शर्मा के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों की दृष्टि पर सीधा असर हो रहा है। यदि यही रफ्तार जारी रही तो 2050 तक आधे बच्चे चश्मे पर निर्भर हो जाएंगे।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।