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Health Tips: दवा की लाल लकीर से लेकर एक्सपायरी डेट तक, ये पांच छोटी भूल दवा को बना सकती है बेकार? समझिए

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 11 Sep 2025 05:47 PM IST
सार

क्या आप दवाई के पत्तों पर दी गई जानकरी को पड़ते हैं? यह सवाल आपके स्वास्थ्य के लिए काफी अहम है। दवा का नाम, उसमें मौजूद सक्रिय तत्व, खुराक की मात्रा, एक्सपायरी डेट, रखने का तरीका और चेतावनियों को नजरअंदाज करने से गलत डोज, दवाओं का हानिकारक रिएक्शन या इलाज का असर कम होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। 
 

दवा खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें...
दवा खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें... - फोटो : AI

विस्तार

क्या आप दवाई के पत्तों पर दी गई जानकरी को पड़ते हैं? यह सवाल आपके स्वास्थ्य के लिए काफी अहम है। दवाई के पत्ते पर लिखा छोटे से छोटा नाम, नंबर और लकीरें स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए काफी अहम होती हैं। 

दवाई का लेबल आपको दवा का नाम, उसमें मौजूद सक्रिय तत्व, खुराक की मात्रा, एक्सपायरी डेट, रखने का तरीका और चेतावनियों के बारे में बताता है। इन जानकारियों को नजरअंदाज करने से गलत डोज, दवाओं का हानिकारक रिएक्शन या इलाज का असर कम होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। 

दवा के पत्ते पर सबसे पहले क्या देखें?
हमेशा पांच चीजों पर सबसे पहले नजर डालें - जेनरिक नाम, खुराक, एक्सपायरी डेट, बनाने की तारीख और बैच नंबर। जेनरिक नाम दवा के असली सक्रिय तत्व का नाम होता है।  खुराक की जानकारी होने से सुनिश्चित होता है कि आप सही मात्रा में दवा ले रहे हैं, न कम, न अधिक। एक्सपायरी और बनाने की तारीख से पता चलता है कि दवा कब तक उपयोग के लिए सुरक्षित और असरदार है। बैच नंबर किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर दवा को बाजार से वापस मंगाने के लिए जरूरी होता है.

जेनरिक और ब्रांड नाम में अंतर समझें
जेनरिक और ब्रांड के नाम में जमीन और आसमान का फर्क होता है। जेनरिक नाम दवा का सक्रिय घटक है, जबकि ब्रांड नाम वह नाम है जिससे कंपनी उसे बाजार में बेचती है। उदाहरण के लिए, पैरासिटामोल जेनरिक नाम है, लेकिन यह आपको बाजार में कई अलग-अलग ब्रांड नामों से मिल सकता है। 

Rx और लाल लकीर का असली मतलब
एंटीबायोटिक्स जैसी दवाओं के पत्ते पर बनी लाल लकीर केवल डिजाइन के लिए नहीं होती। यह एक चेतावनी है कि यह दवा केवल डॉक्टर के पर्चे पर ही दी जाएगी। इसी तरह Rx कै चिह्न का भी यही मतलब होता है।

खुद से अपना इलाज न करें 
दवा के पत्तों पर लिखे शेड्यूल H या शेड्यूल X कोई आम कोड नहीं हैं। शेड्यूल H की दवाएं केवल डॉक्टर के पर्चे पर ही मिल सकती हैं और बिना डॉक्टरी सलाह के इन्हें नहीं लेना चाहिए। शेड्यूल X ये और भी अधिक नियंत्रित दवाएं होती हैं, जैसे कि कुछ मनोरोग संबंधी दवाएं।  ये चिह्न उपभोक्ताओं को याद दिलाने के लिए होते हैं कि वे खुद से अपना इलाज न करें। 

ऐसे जहर बन सकती है दवा 
ठंडी और सूखी जगह पर रखें या फ्रिज में रखें जैसी बातें नजरअंदाज करने के लिए दवाओं के पत्तों पर नहीं दी जाती है। गलत तरीके से स्टोरेज करने पर दवा की स्थिरता बदल जाती है।  इंसुलिन और कुछ एंटीबायोटिक्स अगर फ्रिज में न रखे जाएं तो अपना असर खो देते हैं। गर्मी और नमी से गोलियां टूट सकती हैं, जिससे वे कम असरदार या जहरीली भी हो सकती हैं।