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Cancer Cases: राजस्थान पर कैंसर का साया, जयपुर बना कैंसर कैपिटल, नए अध्ययन ने बजाई खतरे की घंटी

गांव जंक्शन डेस्क, जयपुर Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 06 Sep 2025 05:45 PM IST
सार

एक नए अध्ययन के अनुसार, राजस्थान कैंसर के मामलों में खतरनाक बढ़ोतरी का सामना कर रहा है। यहां प्रति एक लाख की आबादी में कैंसर रोगियों (Cancer Patients) की संख्या के मामले में जयपुर प्रदेश का सबसे बुरी तरह प्रभावित शहर है।
 

राजस्थान में कैंसर के मामलों में खतरनाक बढ़ोतरी।
राजस्थान में कैंसर के मामलों में खतरनाक बढ़ोतरी। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एक नए अध्ययन के अनुसार, राजस्थान कैंसर के मामलों में खतरनाक बढ़ोतरी का सामना कर रहा है। यहां प्रति एक लाख की आबादी में कैंसर रोगियों की संख्या के मामले में जयपुर प्रदेश का सबसे बुरी तरह प्रभावित शहर है।

यह अध्ययन अंतर्राष्ट्रीय रोगों के वर्गीकरण (International Classification of Diseases) के 10 कोडेड डाटा पर आधारित है, जिसमें राजस्थान के अलग-अलग जिलों से आने वाले रोगियों के भौगोलिक वितरण को ध्यान में रखा गया है। बीते साल पंजीकृत कुल 14,911 रोगियों में से 10,363 में कैंसर की पहचान हुई थी। 

अध्ययन के अनुसार, सबसे अधिक रोगी (2,837) जयपुर में पाए गए। यहां एक अनुमान प्रति एक लाख की आबादी पर 332.24 है। इसके बाद अलवर से 1,031, अजमेर से 855, सीकर से 685 और झुंझुनूं से 649 मामले सामने आए हैं। प्रदेश में कैंसर के औसत मामले प्रति एक लाख जनसंख्या पर 134.57 अनुमानित हैं। यह आंकड़ा देश के राष्ट्रीय औसत - 113 मामलों से काफी अधिक है।

भगवान महावीर कैंसर अस्पताल के निदेशक (क्लिनिकल) और मेडिको-लीगल एक्टिविस्ट डॉ. गोपाल काबरा कहते हैं कि मुंह, पाचन और श्वसन कैंसर का उच्च प्रसार जीवनशैली के कारकों जैसे तम्बाकू का उपयोग, शराब का सेवन और कीटनाशकों के संपर्क में आने से जुड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर की बढ़ती घटनाएं जल्द पहचान और उपचार की जरूरत को दिखाती हैं।

डॉ. काबरा ने कहा कि यह विश्लेषण नीति निर्माताओं को प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप की योजना बनाने में मार्गदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि बीते 5 सालों में जयपुर में आधा दर्जन कैंसर केंद्रों का खुलना प्रदेश में कैंसर के रुझान को दिखाता है। डॉ. काबरा का कहना है कि इंडियन कैंसर रजिस्ट्री के साथ डाटा का मेल हमारे निष्कर्षों की विश्वसनीयता को दिखाता है। इस बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने की आवश्यकता है।