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Special Mythological Stories Of Chhath Mahaparva Why Did Mother Sita Karna And King Priyamvad Worship Chhath
छठ महापर्व की खास पौराणिक कथाएं: माता सीता, कर्ण और राजा प्रियंवद ने क्यों की थी छठी मैया की उपासना?
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: shreya singh
Updated Sat, 25 Oct 2025 04:03 PM IST
सार
भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में लोक आस्था, पवित्रता और प्रकृति की पूजा का जो महापर्व सबसे अलग पहचान रखता है, वह है छठ पूजा। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश से शुरू होकर आज यह पर्व पूरी दुनिया में मनाया जाता है। दिवाली के छह दिन बाद कार्तिक मास की शुक्ल षष्ठी को शुरू होने वाले इस चार दिवसीय अनुष्ठान की जड़ें प्राचीन वैदिक काल से जुड़ी हुई हैं। आइए जानते हैं लोकपर्व छठ से जुड़ी कुछ खास और अनसुनी पौराणिक कथाएं, जिन्होंने इस महापर्व को इतना महत्वपूर्ण बना दिया है।
छठ महापर्व की पौराणिक कथाएं
- फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
प्रकृति, पवित्रता और लोक आस्था का महापर्व छठ, उत्तर और पूर्वी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का केंद्र है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आत्म-संयम और शुद्धता की कठिन तपस्या है। सूर्य देव (Surya) और उनकी बहन छठी मैया (Chhathi Mai) को समर्पित यह पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। दिवाली के बाद से ही 15 करोड़ से अधिक भक्तों की आस्था का यह केंद्र बन जाता है। इस अनोखे त्योहार की जड़ें वैदिक काल से जुड़ी हैं, जिसके पीछे कई प्राचीन और प्रेरणादायक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। यह पर्व ऋग्वेद में वर्णित सूर्य एवं उषा पूजन की आर्य परंपरा के अनुरूप भी माना जाता है। आइए जानते हैं छठ महापर्व से जुड़ी कुछ खास पौराणिक कथाएं।
देवी देवसेना यानी छठी मैया की कथा
छठी मैया को बच्चों की रक्षक देवी माना जाता है। ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार, जब ईश्वर ने सृष्टि की रचना की, तो उन्होंने प्रकृति को कई तत्वों में विभाजित किया, जिसका छठा अंश 'षष्ठी' या देवी देवसेना है। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, प्राचीन काल में राजा प्रियंवद और उनकी रानी मालिनी संतान सुख से वंचित थे। उन्होंने पुत्रकामेष्टि यज्ञ किया, जिससे प्राप्त खीर खाने के बाद रानी गर्भवती हुईं, लेकिन उनका पुत्र मृत पैदा हुआ। पुत्र वियोग से दुखी रानी जब आत्महत्या करने जा रही थीं, तभी देवी देवसेना प्रकट हुईं। उन्होंने खुद को 'षष्ठी' बताते हुए रानी से सूर्य देव के साथ अपनी पूजा करने को कहा। रानी ने ऐसा ही किया, जिसके फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तभी से, छठी मैया को बच्चों की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
रामायण काल में छठ पूजा
छठ पूजा का उल्लेख रामायण काल से भी मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, 14 वर्षों के वनवास के बाद जब भगवान राम और माता सीता अयोध्या लौटे, तब राम को रावण (जो एक ब्राह्मण था) का वध करने के प्रायश्चित के लिए यह अनुष्ठान करने की सलाह दी गई थी। ऐसी मान्यता है कि माता सीता ने बिहार के मुंगेर स्थित 'सीता चरण मंदिर' के पास कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की थी।
महाभारत काल में जिक्र
महाभारत काल में भी इस पर्व का महत्व स्पष्ट होता है। सूर्यपुत्र कर्ण अपनी शक्ति और पराक्रम के लिए जाने जाते थे, वे प्रतिदिन सूर्य देव की आराधना करते थे और छठ पूजा से मिलते-जुलते अनुष्ठान करते थे। इसके अलावा, पांडवों द्वारा अपना राजपाट खोने के बाद, द्रौपदी और पांडवों ने भी अपनी समृद्धि और राज्य वापस पाने के लिए सूर्य देव की उपासना और इससे मिलते-जुलते व्रत का अनुपालन किया था।
फसल कटाई और आभार का पर्व
धार्मिक और पौराणिक कथाओं के अलावा, छठ पर्व का संबंध कृषि और प्रकृति से भी है। इस पर्व को फसल कटाई के बाद के त्योहार (Post-Harvest Festival) के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है। यह पर्व किसानों द्वारा पिछली फसल (विशेषकर धान/चावल) की प्रचुरता के लिए सूर्य देव के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका भी है। साथ ही, यह पर्यावरण के सबसे अनुकूल हिंदू त्योहारों में से एक है, जिसमें नदियों और जलाशयों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
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