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Amavasya in March 2026: कब है चैत्र अमावस्या, क्या है शुरुआत व समाप्ति का समय; जानें पूजा विधि और लाभ के उपाय

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 17 Mar 2026 02:59 PM IST
सार

Amavasya in March 2026: हिंदू पंचांग में अमावस्या का दिन पितरों की आत्मा की शांति और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। चैत्र अमावस्या (Chaitra Amavasya) इस बार 18 मार्च को पड़ रही है। अगर आप जानना चाहते हैं कि वर्ष 2026 में चैत्र अमावस्या कब है (when is Amavasya in March 2026), अमावस्या की शुरुआत और समाप्ति का समय क्या है, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि क्या है - तो यह लेख आपके सभी सवालों का जवाब देगा।

चैत्र माह की अमावस्या इसलिए विशेष है क्योंकि यह वैदिक नववर्ष की दहलीज पर आती है।
चैत्र माह की अमावस्या इसलिए विशेष है क्योंकि यह वैदिक नववर्ष की दहलीज पर आती है। - फोटो : AI

विस्तार

Amavasya in march 2026: इस बार चैत्र अमावस्या (Chaitra Amavasya) 18 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। अमावस्या की शुरुआत और समाप्ति के समय के अनुसार; दान, पितृ तर्पण और पूजा-अर्चना के लिए 18 मार्च का दिन सर्वाधिक शुभ रहेगा। द्रिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या की शुरुआत और समाप्ति का समय (amavasya march 2026 start and end time) इस प्रकार है -
  • तिथि आरंभ: 18 मार्च 2026, प्रातः 08:25 बजे
  • तिथि समाप्त: 19 मार्च 2026, प्रातः 06:52 बजे
18 या 19 मार्च (2026) - कब है अमावस्या 
कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल है कि वर्ष 2026 में चैत्र अमावस्या कब है (when is amavasya in march 2026) - 18 मार्च या 19 मार्च? जवाब सीधा है - तिथि 18 मार्च की सुबह शुरू होकर 19 मार्च की सुबह समाप्त होती है, लेकिन दान, तर्पण और पूजा के अधिकांश शुभ मुहूर्त 18 मार्च को ही पड़ते हैं। इसलिए, चैत्र अमावस्या 2026 (Chaitra Amavasya 2026) के समय के अनुसार, मुख्य पर्व 18 मार्च को ही मनाया जाएगा।

चैत्र अमावस्या का है आध्यात्मिक महत्व
चैत्र माह की अमावस्या इसलिए विशेष है क्योंकि यह वैदिक नववर्ष की दहलीज पर आती है। इस दिन सूर्य मीन राशि में होते हैं, जो कर्म शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनुकूल माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितृलोक के द्वार खुलते हैं। श्रद्धा से किया गया तर्पण पूर्वजों की आत्मा को शांति देता है और परिवार में सुख-समृद्धि लाता है। यह दिन पितृ दोष, नकारात्मकता और कर्म दोष से मुक्ति के लिए भी सबसे शक्तिशाली माना जाता है।

चैत्र अमावस्या की पूजा विधि और परंपराएं
  • चैत्र अमावस्या के समय को ध्यान में रखते हुए इन परंपराओं का पालन करें - गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  • घर पर हों तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाएं।
  • दक्षिण दिशा में मुख करके सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • पीपल के नीचे काले तिल और उड़द दाल के साथ दीया जलाएं।
  • तुलसी के पास दीपक जलाना शुभ रहता है।
  • कौओं, चींटियों और गायों को भोजन कराएं।
  • ब्राह्मणों को सात्विक भोजन, वस्त्र और दक्षिणा दें।
  • पितृ तर्पण या पितृ शांति पूजा के लिए पुरोहित को घर बुलाएं।
इस दिन क्या न करें
  • अमावस्या के दिन नया व्यापार शुरू करना, अनुबंध पर हस्ताक्षर करना या महंगी वस्तुएं खरीदना अशुभ माना जाता है।
  • मांसाहार, मदिरा, प्याज और लहसुन से परहेज करें।
  • झगड़े, झूठ और कड़वे वचन से दूर रहें।
  • मान्यता है कि इस दिन रात को सुनसान जगहों पर जाने से बचना चाहिए।