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शरद पूर्णिमा आज : जानें लक्ष्मी मां-चंद्र देव की पूजा विधि, खीर रखने का शुभ समय और क्या करें-क्या न करें...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 06 Oct 2025 03:07 PM IST
सार

हर साल की तरह अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। घरों में मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी तैयारी शुरू हो चुकी हैं। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अमृत की वर्षा करता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने  महारास रचाया था। जानें शरद पूर्णिमा के विधान और शुभ मुहूर्त


 

शरद पूर्णिमा : सोलह कलाओं से परिपूर्ण होगा चंद्रमा
शरद पूर्णिमा : सोलह कलाओं से परिपूर्ण होगा चंद्रमा - फोटो : AI

विस्तार

हर साल की तरह अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। घरों में मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी तैयारी शुरू हो चुकी हैं। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा अमृत की वर्षा करता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने  महारास रचाया था। 

शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
6 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से पूर्णिमा का शुभारंभ होगा और समापन 7 अक्तूबर की सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर होगा। इस दिन रात के समय छत पर खीर रखना बेहद शुभ माना जाता है। 6 अक्तूबर की रात 10 बजकर 37 मिनट से देर रात 12 बजकर 09 मिनट तक का समय खीर रखने के लिए सबसे अच्छा है।

क्या पूर्णिमा पर रहेगा पंचक का साया?
ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार शरद पूर्णिमा पर पंचक का प्रभाव भी देखने को मिलेगा। पंचक की शुरुआत 3 अक्तूबर  से हो गई थी जो 8 अक्तूबर तक रहेंगे। ऐसे में पूर्णिमा के दिन कोई भी शुभ काम करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

शरद पूर्णिमा के विधान 
शरद पूर्णिमा के दिन घरों में मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। सबसे पहले मां लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और गुलाब को फूल चढ़ाएं। इसके अलावा इंद्र कृत लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
मां लक्ष्मी के साथ रात के दौरान चंद्रमा की पूजा करने से शांति और समृद्धि मिलती है। चंद्रमा को अर्घ्य अवश्य दें।
देर रात 12 बजे छत पर खीर रखना न भूलें। गाय के दूध और चावल से बनी इस खीर को रातभर बाहर रखने के बाद सुबह इसे प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों को दें.

इस दिन क्या करें और क्या करने से बचें?
इस दिन दान-पुण्य का खास महत्व है। सफेद चीजें जैसे चावल, दूध या सफेद वस्त्रों का दान करना शुभ माना जात है। वहीं, नदी या पवित्र तालाब के पास दीपदान करने से पितरों को शांति मिलती है। ध्यान रहे कि शरद पूर्णिमा के दिन मांसाहारी या तामसिक भोजन के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है। इस पवित्र दिन पर ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।