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Navratri Why Kanya Pujan Performed At End Of Fast Learn About Its Religious And Mythological Significance
नवरात्रि : व्रत समापन पर क्यों किया जाता है कन्या पूजन? जानें धार्मिक और पौराणिक महत्व
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 24 Sep 2025 12:16 PM IST
सार
कन्या पूजन स्त्री शक्ति के सम्मान का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि नारी ही सृष्टि की जननी और पालनहार है। कन्याओं को अन्न, वस्त्र और उपहार अर्पित करने से परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कन्या पूजन का धार्मिक और पौराणिक महत्व
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। नौ दिनों तक माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना और व्रत-उपवास करने के बाद दशमी तिथि को व्रत का समापन कन्या पूजन के साथ किया जाता है। इसे कन्या भोज भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजने से माता दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
कन्या पूजन का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार कन्या स्वयं देवी का जीवंत रूप मानी जाती हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन सिद्धिदात्री देवी की पूजा होती है और कन्याओं को उसी रूप में सम्मानित कर भोजन कराया जाता है। ऐसा करने से साधक को नवरात्रि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
पौराणिक मान्यता
देवी भागवत पुराण में उल्लेख है कि जब देवताओं ने मां दुर्गा से असुरों के नाश के लिए प्रार्थना की, तो देवी ने कहा कि शक्ति की प्राप्ति केवल कन्याओं की पूजा से संभव है। महिषासुर वध के बाद देवताओं ने भी कन्याओं की पूजा कर देवी दुर्गा का आभार व्यक्त किया। तभी से नवरात्रि व्रत का समापन कन्या पूजन की परंपरा से किया जाने लगा।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण
आचार्य राहुल वशिष्ठ कहते हैं कि कन्या पूजन स्त्री शक्ति के सम्मान का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि नारी ही सृष्टि की जननी और पालनहार है। कन्याओं को अन्न, वस्त्र और उपहार अर्पित करने से परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कन्या पूजन की विधि
घर पर 7, 9 या 11 कन्याओं को आमंत्रित कर स्नान कराकर आसन पर बैठाया जाता है।
उनके चरण धोकर तिलक किया जाता है।
भोजन में पूरी, चना और हलवा परोसा जाता है।
कन्याओं को दक्षिणा, उपहार और लाल चुनरी दी जाती है। \
अंत में उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया जाता है।
कन्या पूजन से मिलने वाले लाभ
घर में लक्ष्मी और सरस्वती का वास होता है।
नकारात्मक ऊर्जा और संकट दूर होते हैं।
परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
भक्त को नवरात्रि व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।
नवरात्रि का यह अनुष्ठान न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी नारी शक्ति के सम्मान का संदेश देता है।
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