इस बार नहाय-खाय के दिन दो अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं, रवि योग और शोभन योग। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, रवि योग का आरंभ आज सुबह से ही हो गया है, जबकि शोभन योग पूरी रात तक रहेगा। इन दोनों योगों में सूर्य देव की पूजा और साधना करने से व्रती को कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
प्रातः काल गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करें। यदि नदी उपलब्ध न हो, तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। घर की रसोई और पूजा स्थल को पूरी तरह से स्वच्छ रखें। पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित कर छठी माता और सूर्य देव का ध्यान करें। व्रत का संकल्प लें और “ॐ अद्य अमुकगोत्रोअमुकनामाहं मम सर्वपापनक्षयपूर्वकशरीरारोग्यार्थ श्री सूर्यनारायणदेवप्रसन्नार्थ श्री सूर्यषष्ठीव्रत करिष्ये।” मंत्र का जाप करें।
व्रती को चारों दिन पवित्रता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। व्रत के दौरान अन्न और जल का सेवन नहीं किया जाता। नहाय-खाय के दिन भोजन में केवल सेंधा नमक का प्रयोग करें। पूरे व्रत काल में क्रोध, विवाद और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहें। चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व श्रद्धा, आस्था और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है, जिसमें व्रती सूर्य देव और छठी मइया से परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं।