बढ़ते खाद्य सब्सिडी बिल को लेकर वित्त मंत्रालय और खाद्य मंत्रालय के बीच गुरुवार को एक अहम होगी। खाद्य मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026 के लिए खाद्य सब्सिडी बजट में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। इस बैठक में इसी प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। मौजूदा बजट अनुमान 2.03 लाख करोड़ रुपये का है।
बढ़ते खाद्य सब्सिडी बिल को लेकर वित्त मंत्रालय और खाद्य मंत्रालय के बीच गुरुवार को एक अहम होगी। खाद्य मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026 के लिए खाद्य सब्सिडी बजट में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। इस बैठक में इसी प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। मौजूदा बजट अनुमान 2.03 लाख करोड़ रुपये का है।
खर्च कम करने की पहल
एफई की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि, वित्त मंत्रालय का मानना है कि खुले बाजार में बिक्री और अनाज आधारित इथेनॉल कार्यक्रम के लिए अनुमानित 20,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त सब्सिडी खर्च को मुख्य खाद्य सब्सिडी से अलग किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि अनाज के भंडार को कम करके, खुले बाजार में चावल की कीमत बढ़ाकर और जैव ईंधन की जरूरतों के लिए कम सब्सिडी वाले अनाज का उपयोग करके ऐसे खर्चों को कम किया जा सकता है।
क्यों बढ़ रहा है सब्सिडी का बोझ
खाद्य मंत्रालय के अनुसार, चावल और गेहूं के एमएसपी में हर साल 3 से 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है। इसके साथ ही, किसानों से होने वाली खरीद के कारण अनाज का भंडार जरूरत से कहीं ज्यादा हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि इसी वजह से भारतीय खाद्य निगम के लिए अनाज के प्रबंधन की आर्थिक लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे अधिक खाद्य सब्सिडी की मांग की जा रही है।
इस महीने की शुरुआत में, सरकार के पास चावल का स्टॉक 44 मिलियन टन से अधिक था, जो 1 अक्तूबर के लिए निर्धारित 10.25 मिलियन टन के बफर मानक से तीन गुना अधिक है।
आंकड़ों में सब्सिडी का गणित
वित्त वर्ष 2026 के लिए चावल की अनुमानित आर्थिक लागत 41.73 रुपये प्रति किलो है। इसके मुकाबले, एफसीआई वर्तमान में इथेनॉल निर्माताओं को 23.2 रुपये प्रति किलो और खुले बाजार में बिक्री के लिए 28 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल की आपूर्ति कर रहा है। एफसीआई ने भी अपने अनुमानित खर्च को वित्त वर्ष 2026 के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.7 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जिसका मुख्य कारण चावल का अतिरिक्त भंडार है।
सरकार का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष में अपने अधिशेष स्टॉक से रिकॉर्ड 10 मिलियन टन चावल बाजार में रियायती दर पर बेचना है। अब तक, 6.1 मिलियन टन चावल की बिक्री की जा चुकी है। यह बैठक बढ़ते खाद्य सब्सिडी खर्च को नियंत्रित करने और एफसीआई के पास मौजूद अतिरिक्त स्टॉक को कम करने के तरीकों पर केंद्रित होगी।