Home Youth Junction Attention Farmers Follow These Steps Before Sowing Chickpeas For Higher Yield

किसानों के काम की खबर: चने की बुवाई से पहले अपनाएं ये उपाय, डबल हो जाएगी पैदावार, खूब फायदा मिलेगा

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Mon, 27 Oct 2025 12:08 PM IST
सार

 कई तरह के उपायों को अपनाकर किसान न केवल चने की उच्च पैदावार प्राप्त कर सकते हैं बल्कि मुनाफे को भी बढ़ा सकते हैं। 

चने की खेती
चने की खेती - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही देश के कई हिस्सों में चने की बुवाई शुरू हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुवाई से पहले सही तैयारी और बीजोपचार करने से फसल न केवल रोग और कीटों से सुरक्षित रहती है, बल्कि पैदावार में 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी भी हो सकती है। राजस्थान के अजमेर कृषि अनुसंधान केन्द्र के विशेषज्ञों ने किसानों को चने की बुवाई से पहले अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक विधियों के बारे में महत्वपूर्ण सलाह दी है।

 
1. उपयुक्त भूमि और समय का चयन
अजमेर के उप निदेशक कृषि (शस्य) मनोज कुमार शर्मा के अनुसार, चने की फसल के लिए लवण और क्षार रहित, जल निकास वाली उपजाऊ दोमट भूमि सर्वोत्तम मानी जाती है। वर्तमान समय चने की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। मृदा उपचार और बीजोपचार से कीटों और रोगों से बचाव संभव है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है। कृषि रसायनों का उपयोग करते समय पूरा कपड़ा, मास्क और दस्ताने पहनना जरूरी है।

2. बीजोपचार से फसल को रोगों से बचाएं
कृषि अनुसंधान अधिकारी (पौध व्याधि) डॉ. जितेन्द्र शर्मा के अनुसार, बीजोपचार एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिससे बीज एवं मिट्टी में पनपने वाले रोगों और कीटों से फसल की सुरक्षा होती है। चने में मुख्य रूप से जड़ गलन, सूखा जड़ गलन और उकठा रोग दिखाई देते हैं।
  • उपाय: भूमि का उपचार: 2.5 किलो ट्राईकोडर्मा को 100 किलो नम गोबर में मिलाकर 10–15 दिन तक छाया में रखें, फिर बुवाई के समय प्रति हेक्टेयर मिट्टी में मिलाएँ।
  • बीजोपचार: 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम + 2.5 ग्राम थाइरम प्रति किलो बीज या 2 ग्राम कार्बोक्सीन (37.5%) + थाइरम (37.5%) या 10 ग्राम ट्राईकोडर्मा प्रति किलो बीज
3. कीट नियंत्रण के उपाय
सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी (कीट) डॉ. सुरेश चौधरी के अनुसार, दीमक, कटवर्म और वायरवर्म मुख्य कीट हैं। अंतिम जुताई से पहले क्यूनालफॉस 1.5% चूर्ण 25 किलो प्रति हेक्टेयर भुरकाव करें।
  • बीज उपचार: फिप्रोनिल 5 SC (10 मि.ली.) या इमीडाक्लोप्रिड 600 FS (5 मि.ली.) प्रति किलो बीज।

4. जैव उर्वरक और पोषक तत्वों का उपयोग
डॉ. कमलेश चौधरी ने कहा कि बीजों को बुवाई से पहले राईजोबियम, पी.एस.बी., गंधक और जिंक घोलक जैसे जैव उर्वरकों से उपचारित करें। मात्रा 3–5 मि.ली. प्रति किलो बीज। यह मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ाता है और फसल की पैदावार में सुधार करता है।

5. संतुलित पोषण और खरपतवार नियंत्रण
  • असिंचित क्षेत्रों में: 10 किलो नत्रजन + 25 किलो फास्फोरस प्रति हेक्टेयर
  • सिंचित क्षेत्रों में: 20 किलो नत्रजन + 40 किलो फास्फोरस, 12–15 सेंटीमीटर गहराई पर अंतिम जुताई के समय डालें।
  • खरपतवार नियंत्रण: बुवाई के बाद लेकिन बीज अंकुरण से पहले पेन्डीमिथेलीन 30 EC 2.5 लीटर या पेन्डीमिथेलीन 38.7 CS 1.9 लीटर प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
किसानों के लिए सलाह
इन उपायों को अपनाकर किसान न केवल चने की उच्च पैदावार प्राप्त कर सकते हैं बल्कि मुनाफे को भी बढ़ा सकते हैं। किसी भी रसायन या उर्वरक का उपयोग विशेषज्ञ की सलाह और कृषि विभाग की जानकारी के बिना न करें।