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Story: शांडिली की उदारता के पीछे छिपा तिल का सच ऐसे हुआ उजागर

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Fri, 25 Apr 2025 12:11 AM IST
सार

अपने गंदे तिलों के बदले पड़ोसी से दूसरे तिल लेने की शांडिली की चाल सफल नहीं हो सकी। उसकी पड़ोसन ने भांप लिया कि शांडिली की इस उदारता के पीछे दाल में जरूर कुछ काला है। 

शांडिली पड़ोसी के यहां गई और कुत्ते द्वारा गंदे किए गए अपने तिलों के बदले कुछ छिलके वाले तिल मांगे।
शांडिली पड़ोसी के यहां गई और कुत्ते द्वारा गंदे किए गए अपने तिलों के बदले कुछ छिलके वाले तिल मांगे। - फोटो : AI

विस्तार

रामनगर गांव में एक विद्वान ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी का नाम शांडिली था। वो दोनों गरीब होने के बावजूद अपना गुजर-बसर हंसी-खुशी से कर रहे थे। एक दिन सवेरे ब्राह्मण ने अपनी पत्नी से कहा - कल का दिन बेहद शुभ है, एक विशेष त्योहार है। यह भिक्षा के लिए सही समय होगा। मैं शहर जाऊंगा। मुझे यकीन है कि कल मुझे बहुत सारी भिक्षा मिलेगी, जिससे हमारा गुजारा कई दिनों तक चल जाएगा।

ब्राह्मण ने आगे अपनी पत्नी से कहा - तुम्हें भी किसी ब्राह्मण भी आमंत्रित करना चाहिए और उसे भोजन व कपड़े दान करने चाहिए। यह एक शुभ दिन है और ऐसा करने से हमें भी पुण्य मिलेगा।यह सुनकर ब्राह्मण की पत्नी ने कहा, मैं किसी ब्राह्मण को आमंत्रित नहीं कर सकती क्योंकि हम पहले से ही बहुत गरीब हैं। हमारे पास न तो अच्छा खाना है, न ही अच्छे कपड़े। ऐसे में, मैं किसी ब्राह्मण को भला कैसे आमंत्रित कर सकती हूं। 

ब्राह्मण ने अपनी पत्नी को समझाते हुए कहा, भले ही हमारे पास खाने के लिए एक निवाला हो, हमें उसका आधा हिस्सा किसी जरूरतमंद के साथ बांटना चाहिए। काफी समझाने के बाद ब्राह्मणी ने कहा, मेरे पास कुछ तिल हैं। मैं उन्हें साफ करके उनकी भूसी निकाल दूंगी और आमंत्रित किए गए ब्राह्मण के लिए स्वादिष्ट व्यंजन बनाऊंगी। 

अगली सुबह ब्राह्मण योजना के अनुसार शहर भिक्षा मांगने के लिए निकल पड़ा। उसके जाने के बाद उसकी पत्नी ने तिलों को गर्म पानी में साफ किया और सावधानी से उनकी भूसी निकाल दी। फिर, उसने तिलों को बाहर धूप में सूखने के लिए रख दिया। इस बीच वह अपने घर के काम निपटाने लगी। इसी दौरान एक कुत्ता आया और तिलों को गंदा कर दिया। ब्राह्मणी ने यह देखा और तुरंत कुत्ते को भगा दिया। 

उसने सोचा, भाग्य ने मेरे प्रयासों पर पानी फेर दिया। लेकिन, मेरे पास तो बस ये तिल ही हैं। इसलिए, मैं पड़ोसी से एक चाल चलूंगी। मैं इन साफ और बिना छिलके वाले तिलों के बदले कुछ छिलके वाले तिल मांग लूंगी। वह अपने पड़ोसी के यहां गई और कुत्ते द्वारा गंदे किए गए अपने तिलों के बदले कुछ छिलके वाले तिल मांगे। पड़ोसी घर की महिला बहुत खुश हुई। उसने सोचा तिलों को साफ करने और उनके छिलके निकालने में बहुत समय लगता है और ब्राह्मणी को छिलके वाले तिल दे दिए। जब वे बातचीत कर रहे थे, तभी पड़ोसी का बेटा बाहर आया। उसने कहा, मां! कौन साफ तिलों को छिलके और धूल मिट्टी वाले तिलों से भला बदलना चाहेगा? कोई कारण जरूर होगा कि वह इतना आकर्षक प्रस्ताव दे रही है। कृपया इस प्रस्ताव को स्वीकार न करें। जब महिला ने अपने बेटे की सलाह सुनी, तो उसने विनम्रतापूर्वक प्रस्ताव ठुकरा दिया। 

शांडिली को यह एहसास हो गया था कि वह अपने पड़ोसी को धोखा देने में विफल रही है, तो वह घर लौट आई। बुद्धिमान लोग सच ही कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति आपको ऐसी चीज दे, जो वास्तविकता से बहुत अच्छी हो, तो उसके बहकावे में न आएं - सोच-विचार करके फैसला करें। नहीं तो नुकसान उठाना पड़ सकता है।