Home Kheti Kisani Kushinagar Machagar Village Paddy Black Salt Paddy Black Salt Paddy Cultivation Fpo Free Seeds Crop

नई बयार : पारंपरिक खेती छोड़कर कालानमक धान और श्री अन्न की खेती कर रहे किसान, दोगुनी तक बढ़ी कमाई

शैलेश अरोड़ा, कुशीनगर Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 23 Sep 2025 12:41 PM IST
सार

पूर्वांचल के कई जिलों के किसान पारंपरिक खेती छोड़कर बुद्ध का प्रसाद कहे जाने वाले कालानमक धान और श्री अन्न की खेती कर रहे हैं। इससे किसानों की आय पारंपरिक फसलों के मुकाबले दोगुनी तक बढ़ गई है। 

एफपीओ से जुड़कर किसान कालानमक धान और श्री अन्न की खेती और प्रोसेसिंग कर रहे हैं।
एफपीओ से जुड़कर किसान कालानमक धान और श्री अन्न की खेती और प्रोसेसिंग कर रहे हैं। - फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार

कुशीनगर जिले के मछागर गांव के नागेंद्र अपने दो एकड़ खेत में पहले साधारण धान उगाते थे, जिससे प्रति एकड़ करीब 40000 रुपये की आय होती थी। दो साल पहले उन्होंने आधा एकड़ में कालानमक धान की खेती शुरू की, जिससे उत्पादन 20 फीसदी कम हुआ, लेकिन कीमत दोगुनी मिली। साधारण धान 2200-2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकता था, वहीं कालानमक धान 4500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक गया। इस साल नागेंद्र ने दो एकड़ में कालानमक धान लगाया है। एफपीओ से निःशुल्क बीज इस शर्त पर मिल गया कि फसल पैदा होने के बाद एक किलो बीज के बदले तीन किलो धान देना होगा। इसी से बीज बैंक विकसित हो रहा है। 

ये भी पढ़ें : महिलाओं को नवरात्रि का तोहफा, सरकार बांटेगी 25 लाख नए उज्ज्वला गैस कनेक्शन, जानें पात्रता और आवेदन का तरीका

700 एकड़ में फैल गई नई फसल  
महाराजगंज जिले के लखीमा गांव के रमेश पटेल ने भी पांच एकड़ में से एक एकड़ में कालानमक लगाया है। दरअसल, नागेंद्र और रमेश की तरह पूर्वांचल के कई किसानों ने अब पारंपरिक फसलों को छोड़कर भगवान बुद्ध का प्रसाद कहे जाने वाले कालानमक धान और श्री अन्न की खेती शुरू कर दी है। एक स्थानीय एफपीओ से जुड़कर ये किसान करीब 500 एकड़ में कालानमक धान और 200 एकड़ में श्री अन्न की खेती कर रहे हैं। साधारण धान की खेती की तुलना कालानमक धान करने से इन किसानों को आमदनी भी अधिक हो रही है। इन किसानों को आपस में जोड़ने, एक मंच पर लाने और सामूहिक रूप से बड़े स्तर पर काम करने का पाठ एक शिक्षक ने पढ़ाया है।

500 एकड़ में कालानमक धान
अंशुमान कहते हैं कि भगवान बुद्ध के प्रसाद के रूप में पूर्वांचल को कालानमक धान मिला, जो यहां का जीआई-प्रमाणित उत्पाद है और क्षेत्र की समृद्धि का आधार बन सकता है। वह बताते हैं, वर्ष 2007 में एमबीए किया, मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने के बाद 2016 में गांव के सरकारी स्कूल में शिक्षक बने और 2022 में एफपीओ गठन कराया। पदमश्री रामचेत चौधरी से कई बारीकियां सीखीं। पहले साल 100 एकड़ में कालानमक धान उगाया गया, जो अब 500 एकड़ तक पहुंच गया है। इस पहल में कुशीनगर, महाराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, सिद्धार्थनगर के किसान शामिल हैं।

ये भी पढ़ें : किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा, भारत-ब्राजील ने लॉन्च की मैत्री 2.0 पहल, नई तकनीक खेत तक पहुंचेगी, जानें सब कुछ

शिक्षक ने जगाई बदलाव की अलख 
कुशीनगर के मंसूरगंज गांव के अंशुमान उपाध्याय परिषदीय विद्यालय में शिक्षक हैं। साल 2023 में, उन्होंने गांव के किसानों को जोड़कर एक एफपीओ बनाने का विचार किया। उन्होंने किसानों को समझाया कि कैसे एफपीओ से उनकी आमदनी बढ़ सकती है। अपने पिता को भी इस एफपीओ से जुड़ने के लिए कहा। आखिरकार, एफपीओ का गठन हुआ। यह एफपीओ कालानमक धान और मिलेट्स यानी श्री अन्न की खेती, प्रोसेसिंग व मार्केटिंग पर काम करता है। सरकारी शिक्षक होने के चलते अंशुमान इस एफपीओं में पदाधिकारी तो नहीं हैं, लेकिन स्कूल के बाद समय मिलने पर वह किसानों के साथ काम करते हैं।

खत्म हुईं चिंताएं, बढ़ी कमाई 
किसानों को एफपीओ के जरिए फसल उत्पादन और देखभाल की वैज्ञानिक तकनीक अपनाने में भी मदद मिलती है। साथ ही, फसल बेचने को लेकर उनकी चिंताएं खत्म हो गई हैं, क्योंकि एफपीओ पूरा उत्पादन खरीद लेता है। साधारण धान से एक एकड़ में 18 क्विंटल उपज मिलती है, जिसका भाव 2200-2300 रुपये प्रति क्विंटल होता है और प्रति एकड़ 40000 रुपये आय होती है। वहीं, कालानमक धान से 15 क्विंटल उपज मिलती है और भाव 4000-4500 प्रति क्विंटल होता है। इस तरह, प्रति एकड़ 60-65 हजार रुपये प्रति एकड़ मिल जाते हैं। बीज का खर्च भी नहीं होता।

ये भी पढ़ें : एक ही उत्पाद पर टैक्स की दो दरें? बायोस्टिमुलेंट्स पर GST को लेकर उद्योग जगत में भ्रम, सरकार से मांगी सफाई...

कालानमक की खेती में रासायनिक खाद, कीटनाशक व खरपतवारनाशी का खर्च कम होता है। अंशुमान ने बताया कि एफपीओ सांवा, कोदो, ज्वार जैसे मिलेट्स (श्री अन्न) पर भी काम कर रहा है। दो साल पहले 200 एकड़ में श्री अन्न की खेती की गई, लेकिन प्रोसेसिंग के लिए तमिलनाडु भेजने से लागत बढ़ गई। अब एफपीओ ने प्रोसेसिंग के लिए अपनी मिलेट मिल स्थापित कर ली है। हर माह औसतन एक टन श्री अन्न बिक रहा है, जिसे बढ़ाने की योजना है।