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ग्रीष्मकालीन फसल बुवाई 2026: कुल क्षेत्रफल 36.22 लाख हेक्टेयर, चावल पिछड़ा, दलहन में जबरदस्त बढ़त, आंकड़े जारी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Tue, 17 Mar 2026 08:34 PM IST
सार

13 मार्च 2026 तक ग्रीष्मकालीन फसलों की कुल बुवाई 36.22 लाख हेक्टेयर रही जो पिछले साल की इसी अवधि के 37.25 लाख हेक्टेयर से 1.03 लाख हेक्टेयर कम है। चावल और मोटे अनाज में कमी आई जबकि दलहन - विशेषकर मूंग और उड़द - में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

मूंग की खेती
मूंग की खेती - फोटो : AI Image

विस्तार

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकडों के अनुसार 13 मार्च 2026 तक ग्रीष्मकालीन फसलों की कुल बुवाई 36.22 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकडा 37.25 लाख हेक्टेयर था यानी इस बार 1.03 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, सामान्य ग्रीष्मकालीन क्षेत्र 75.37 लाख हेक्टेयर माना जाता है और 2025 का अंतिम क्षेत्र 83.92 लाख हेक्टेयर था। अभी बुवाई का सीजन जारी है और रकबे में वृद्धि हो सकती है। 

चावल में कमी - 26.75 लाख हेक्टेयर पर सिमटी बुवाई
ग्रीष्मकालीन फसलों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले चावल की बुवाई इस बार 26.75 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल की इसी अवधि के 27.97 लाख हेक्टेयर से 1.22 लाख हेक्टेयर कम है। सामान्य क्षेत्र 31.49 लाख हेक्टेयर के मुकाबले भी यह पीछे है। धान उत्पादक राज्यों में बुवाई की रफ्तार अभी धीमी बनी हुई है।

दलहन में जबरदस्त उछाल - मूंग और उड़द आगे
दलहन की बुवाई में इस बार उत्साहजनक तस्वीर है। कुल दलहन क्षेत्र 2.25 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 1.74 लाख हेक्टेयर से 0.51 लाख हेक्टेयर अधिक है। मूंग की बुवाई 1.09 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.33 लाख हेक्टेयर और उड़द की बुवाई 0.51 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 0.71 लाख हेक्टेयर हो गई। अन्य दलहन में भी 0.08 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

मोटे अनाज और श्रीअन्न - मामूली कमी
श्रीअन्न और मोटे अनाजों की बुवाई 4.14 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल के 4.41 लाख हेक्टेयर से 0.26 लाख हेक्टेयर कम है। मक्का में 0.22 लाख हेक्टेयर, ज्वार में 0.10 लाख हेक्टेयर और बाजरे में 0.02 लाख हेक्टेयर की कमी आई। हालांकि, रागी में 0.08 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

तिलहन - लगभग पिछले साल के बराबर
तिलहन की बुवाई 3.08 लाख हेक्टेयर रही जो पिछले साल के 3.13 लाख हेक्टेयर से मात्र 0.06 लाख हेक्टेयर कम है। सूरजमुखी में 0.03 लाख हेक्टेयर की बढ़त रही जबकि मूंगफली और तिल में मामूली कमी दर्ज की गई।