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Sugar Industry Faces Setback As Ethanol Prices From Cane Feedstocks Remain Unchanged
चीनी उद्योग को बड़ा झटका : गन्ने से तैयार होने वाले इथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं, चावल वाले के दाम बढ़े
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Thu, 25 Sep 2025 10:00 AM IST
सार
सेंटरम कैपिटल के शैलेश कनानी ने कहा कि सरकार का यह कदम एकीकृत शुगर कंपनियों के लिए नकारात्मक है। उन्होंने कहा, “हमने उम्मीद की थी कि गन्ने की बढ़ी हुई एफआरपी (Fair and Remunerative Price) के अनुरूप इथेनॉल दरों में कम से कम 3% बढ़ोतरी होगी।
इथेनॉल की कीमतें
- फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
केंद्र सरकार ने इथेनॉल सप्लाई ईयर 2025-26 (नवंबर-अक्टूबर) के लिए कीमतों की घोषणा कर दी है। इसमें जहां एफसीआई चावल से बनने वाले इथेनॉल की कीमतें बढ़ा दी गई हैं, वहीं गन्ना आधारित इथेनॉल की दरें पिछले साल की ही तरह रखी गई हैं। इस फैसले से शुगर उद्योग को तगड़ा झटका लगा है, क्योंकि गन्ना उत्पादक मिलों को बढ़ती लागत का बोझ झेलना पड़ेगा जबकि उन्हें कोई अतिरिक्त राहत नहीं मिलेगी।
मंगलवार को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने ESY 2025-26 के लिए 1,050 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति के लिए निविदाएं आमंत्रित कीं। नई दरों के मुताबिक, एफसीआई से मिलने वाले अधिशेष चावल पर आधारित इथेनॉल की कीमत ₹58.50 से बढ़ाकर ₹60.32 प्रति लीटर कर दी गई है, यानी करीब 3% की बढ़ोतरी। एफसीआई गोदाम से डिस्टिलरी को चावल बेचने की रिजर्व कीमत भी ₹22.50 से बढ़ाकर ₹23.20 प्रति किलो कर दी गई है।
गन्ना इथेनॉल की दरें जस की तस
गन्ना आधारित इथेनॉल पर कोई बदलाव नहीं किया गया। गन्ना जूस/सिरप आधारित इथेनॉल की कीमत 65.61 रुपये प्रति लीटर, बी-हेवी शीरे (BHM) से तैयार इथेनॉल की कीमत 60.73 प्रति लीटर, सी-हेवी शीरे (CHM) से बने इथेनॉल की कीमत 57.97 रुपये प्रति लीटर, क्षतिग्रस्त अनाज से तैयार इथेनॉल की कीमत 64 रुपये प्रति लीटर, मक्का से तैयार इथेनॉल के दाम 71.86 रुपये प्रति लीटर रखा गया है। इन सभी दरों को पिछले साल की ही तरह बरकरार रखा गया है।
शुगर मिलों पर दबाव
सेंटरम कैपिटल के शैलेश कनानी ने कहा कि सरकार का यह कदम एकीकृत शुगर कंपनियों के लिए नकारात्मक है। उन्होंने कहा, “हमने उम्मीद की थी कि गन्ने की बढ़ी हुई एफआरपी (Fair and Remunerative Price) के अनुरूप इथेनॉल दरों में कम से कम 3% बढ़ोतरी होगी। लेकिन कीमतें जस की तस रहने से शुगर मिलों की मार्जिन और घट जाएगी।”
विशेषज्ञों का मानना है कि शुगर मिलों को गन्ने की ऊंची लागत तो चुकानी होगी, लेकिन इथेनॉल बिक्री से उन्हें कोई अतिरिक्त फायदा नहीं मिलेगा। इससे न सिर्फ़ उनकी मौजूदा आय पर असर पड़ेगा, बल्कि गन्ना आधारित इथेनॉल वैल्यू चेन में नीतिगत सपोर्ट की दिशा पर भी सवाल खड़े होंगे।
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