गुजरात की डेयरी क्वीन की कहानी: हर साल दूध उत्पादन से करोड़ों कमा रहीं ये महिलाएं, बदल रहा गांवों का चेहरा
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Thu, 25 Sep 2025 08:57 AM IST
सार
गुजरात की कई महिलाएं हैं, जो हर साल दूध उत्पादन से एक करोड़ से ज्यादा की कमाई करती हैं।
बनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी के साथ बनासकांठा जिले की 60 वर्षीय नवलबेन चौधरी।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कौन बनेगा करोड़पति? का मंच नहीं, बल्कि अपने ही आंगन और गोशालाओं में गुजरात की महिलाएं करोड़पति बन रही हैं। बनासकांठा जिले की 60 वर्षीय नवलबेन चौधरी इसकी मिसाल हैं, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में अकेले डेयरी व्यवसाय से 2.04 करोड़ रुपये की कमाई की।
नवलबेन उन 10 महिला दुग्ध उत्पादकों में शामिल हैं जिन्हें हाल ही में बनास डेयरी (गुजरात की सबसे बड़ी दूध संग्रहण सहकारी संस्था) की वार्षिक आम बैठक में सम्मानित किया गया। पिछले साल 14 महिलाओं ने डेयरी से एक करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित की।
डेयरी किसान
- फोटो : सोशल मीडिया
संघर्ष से सफलता तक
नवलबेन, जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा, ने सिर्फ 15 पशुओं से डेयरी यात्रा शुरू की थी। आज उनके पास करीब 300 गाय-भैंस हैं और वे रोज 1500 लीटर दूध बनास डेयरी को सप्लाई करती हैं। उनके बेटे मुकेश चौधरी बताते हैं, “मां भले ही पढ़ी-लिखी न हों, लेकिन पशु प्रबंधन और देखभाल में एक्सपर्ट हैं।”
इसी तरह, बनासकांठा की ही 45 वर्षीय दरियाबेन राजपूत ने बीते वित्त वर्ष में 1.85 करोड़ रुपये की कमाई की। 18 साल की उम्र में शादी के बाद से ही वे पशुपालन कर रही हैं और फिलहाल 200 भैंसों और 100 गायों की देखभाल करती हैं। दरियाबेन रोजाना 1000 लीटर दूध देती हैं और महीने में करीब 20 लाख रुपये कमाती हैं।
करोड़ों की कमाई करने वाली महिलाएं
इस सूची में तसलीमबेन जावेरी (1.93 करोड़), मनीबेन चौधरी (1.94 करोड़), लीलाबेन चौधरी (1.06 करोड़), केशबेन वगड़ा (1 करोड़) समेत कई महिलाएं शामिल हैं। कुछ अन्य ने 90 लाख से अधिक की कमाई की। खास बात यह है कि सभी समुदायों की महिलाएं इस सफलता की सूची में शामिल हैं।
डेयरी से बदला सामाजिक परिदृश्य
बनास डेयरी के चेयरमैन और गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी के मुताबिक, हर महीने किसानों के खातों में सीधे 1200 करोड़ रुपये डाले जाते हैं। इस आय ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। उन्होंने कहा, “जो परिवार कभी कच्चे घरों में रहते थे, आज पक्के मकानों और गाड़ियों के मालिक हैं। शिक्षा पर निवेश बढ़ा है और बनासकांठा जैसे पिछड़े जिले अब शिक्षा में आगे निकल रहे हैं। यही असली डेयरी क्रांति है।”
दूध उत्पादन
- फोटो : सोशल मीडिया
तसलीमबेन की कहानी
30 वर्षीय तसलीम ज़ावेरी का कहना है कि डेयरी ने उनके परिवार की किस्मत बदल दी। “शादी के समय पति के पास सिर्फ 25 पशु थे, अब हमारे पास 300 हैं। हमने न सिर्फ़ आमदनी बढ़ाई बल्कि ज़मीन और ट्रैक्टर भी खरीदा। आज हमारी रोज़ाना 1400 लीटर दूध की सप्लाई से 22 परिवारों की रोज़ी-रोटी चल रही है।”
महिलाओं की भागीदारी में उछाल
गुजरात सरकार के अनुसार राज्य की कुल 21,000 दूध सहकारी समितियों में से 4986 का नेतृत्व महिलाएं करती हैं। 2014-15 में जहां सिर्फ 805 महिलाएं सरकारी सहायता का लाभ ले रही थीं, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 42,337 हो गई। पिछले 10 वर्षों में कुल 2.14 लाख महिलाएं विभिन्न पशुपालन योजनाओं से लाभान्वित हुई हैं।
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