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Kisankraft To Expand Exports To 50 Countries Unveils Battery Powered Weeders For Sustainable Farming
KisanKraft: अब 50 देशों में निर्यात बढ़ाएगा किसानक्राफ्ट, टिकाऊ खेती के लिए बैटरी चालित वीडर लॉन्च होगा
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Tue, 26 Aug 2025 04:22 PM IST
सार
किसानक्राफ्ट के चेयरमैन और संस्थापक रविंद्र अग्रवाल ने कहा कि कंपनी का असर सिर्फ कृषि उत्पादकता तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत की सामाजिक-आर्थिक संरचना तक पहुंचा है। छोटे और सीमांत किसानों को किफायती मशीनें उपलब्ध कराकर कंपनी ने उन्हें आय बढ़ाने के नए अवसर दिए हैं।
कृषि उपकरणों का निर्यात
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बेंगलुरु स्थित कृषि उपकरण निर्माता किसानक्राफ्ट लिमिटेड (KisanKraft Ltd.) ने आने वाले पांच वर्षों में अपने उत्पादों का निर्यात बढ़ाकर 50 देशों तक पहुंचाने की योजना बनाई है। वर्तमान में कंपनी श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, फिलीपींस, आइवरी कोस्ट और घाना जैसे लगभग 10 देशों में इंटर-कल्टीवेटर और ब्रश कटर सहित कई उपकरणों का निर्यात कर रही है।
कंपनी ने अपने 20 साल पूरे होने के मौके पर घोषणा की कि वह जल्द ही स्वदेशी बैटरी चालित वीडर (Battery-powered Weeders) लॉन्च करेगी, जो टिकाऊ मशीनीकरण को बढ़ावा देगा। साथ ही कंपनी का लक्ष्य देश की 20 प्रमुख फसलों (धान, गेहूं, मक्का आदि) के लिए एंड-टू-एंड मैकेनाइजेशन सॉल्यूशंस उपलब्ध कराना है।
अफ्रीका में एंट्री और विस्तार की योजना
किसानक्राफ्ट ने हाल ही में अफ्रीकी बाजार में कदम रखा है और अब अगले पाँच सालों में 50 देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। कंपनी का विनिर्माण संयंत्र नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) में स्थित है। 2005 में स्थापित किसानक्राफ्ट इस समय करीब 300 उत्पादों की रेंज पेश करता है, जिसमें भूमि की तैयारी से लेकर बुआई, फसल प्रबंधन, कटाई और कटाई के बाद की प्रक्रियाओं तक शामिल हैं।
बीज कारोबार में भी कदम
कंपनी ने बीज कारोबार में भी कदम रखा है और टमाटर व भिंडी जैसी सब्जियों के कई हाइब्रिड लॉन्च किए हैं। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों में किसानक्राफ्ट ने डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) पद्धति के लिए उपयुक्त 15 नई धान की किस्में विकसित की हैं, जिनमें कम पानी की आवश्यकता होती है।
ग्रामीण भारत में असर
किसानक्राफ्ट के चेयरमैन और संस्थापक रविंद्र अग्रवाल ने कहा कि कंपनी का असर सिर्फ कृषि उत्पादकता तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत की सामाजिक-आर्थिक संरचना तक पहुँचा है। छोटे और सीमांत किसानों को किफायती मशीनें उपलब्ध कराकर कंपनी ने उन्हें आय बढ़ाने के नए अवसर दिए हैं।
उन्होंने बताया कि कंपनी के मैकेनिक ट्रेनिंग प्रोग्राम ने ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दिया है और लोकल सर्विस नेटवर्क तैयार किए हैं। साथ ही, किसानक्राफ्ट की किफायती मशीनें अक्सर एक ही फसल सीजन में लागत निकाल देती हैं। कंपनी ने उपकरण किराए पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था (Rental Ecosystem) को भी मजबूत किया है, जिससे ग्रामीण आय में इजाफा हुआ है।
आने वाले समय में कंपनी अपनी बीज इकाई को और मजबूत करने तथा जलवायु-स्मार्ट कृषि (Climate-smart agriculture) के लिए उच्च उपज व सहनशील किस्मों पर काम करेगी।
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