अच्छी खबर: भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात 17% बढ़कर 3.97 अरब डॉलर पहुंचा, अमेरिका को शिपमेंट घटी लेकिन...
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Thu, 06 Nov 2025 08:37 AM IST
सार
भारत के लिए यह वृद्धि ऐसे समय आई है जब अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ने और शुल्कों के चलते निर्यातकों को नुकसान की आशंका थी। फिर भी, विविध बाजारों में पैठ और उत्पाद विविधीकरण के प्रयासों ने भारत के समुद्री निर्यात क्षेत्र को मजबूती दी है।
सार्डिन मछली
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अमेरिकी शुल्कों और मांग में गिरावट की आशंकाओं के बावजूद भारत के समुद्री उत्पादों का निर्यात चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2025) में 17 फीसदी बढ़कर 3.97 अरब डॉलर (लगभग ₹33,000 करोड़) तक पहुंच गया है। यह पिछले साल की समान अवधि के 3.38 अरब डॉलर की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। वाणिज्य मंत्रालय के त्वरित अनुमानों के अनुसार, सितंबर 2025 में ही समुद्री उत्पादों का निर्यात 23.4% बढ़कर 781.02 मिलियन डॉलर रहा, जबकि पिछले साल यह 632.70 मिलियन डॉलर था।
त्योहारी मांग और बाजार विस्तार से मिली बढ़त
किंग्स इन्फ्रा के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक शाजी बेबी जॉन ने कहा कि इस वर्ष निर्यात में बढ़ोतरी का मुख्य कारण क्रिसमस और नववर्ष की वैश्विक मांग रही है। वित्त वर्ष की शुरुआती दो महीनों में गिरावट के बावजूद बाद में बाजारों में सुधार देखने को मिला। उन्होंने इस वृद्धि का श्रेय वाणिज्य मंत्रालय, मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA) और उद्योग के संयुक्त प्रयासों को दिया, जिन्होंने अमेरिका के घटते बाजार को यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व में नए बाजारों से संतुलित किया। उन्होंने बताया कि झींगा (Shrimp) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है क्योंकि स्वास्थ्य के प्रति सजग उपभोक्ता उच्च प्रोटीन युक्त आहार पसंद कर रहे हैं। किसान अब मध्यम आकार के झींगे की उत्पादन पर ध्यान दे रहे हैं, जिन्हें एशियाई और यूरोपीय बाजारों में प्राथमिकता दी जाती है, जबकि अमेरिका में मुख्यतः बड़े आकार के झींगे भेजे जाते हैं।
एशियाई बाजारों में बढ़ा निर्यात, अमेरिका में गिरावट
एमपीईडीए के निदेशक राम मोहन ने बताया कि अप्रैल-सितंबर 2025 के दौरान अमेरिका को निर्यात में लगभग 6 फीसदी की गिरावट आई है, लेकिन चीन, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों को शिपमेंट में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह एशियाई बाजारों की ओर व्यापारिक रुझान में बदलाव का संकेत है। कोच्चि में आयोजित इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन मरीन इकोसिस्टम्स (MECOS-4) के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि अब भारत को बाजारों का विविधीकरण, मूल्यवर्धन (Value Addition) और तकनीकी नवाचार पर जोर देना होगा ताकि समुद्री निर्यात की वृद्धि बरकरार रखी जा सके।
‘कच्चे उत्पादों’ से आगे बढ़ने की जरूरत
आईसीएआर-सीआईएफटी (ICAR-CIFT) के निदेशक जॉर्ज निनन ने कहा कि मत्स्य क्षेत्र में एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाने की जरूरत है, जिससे वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के लोगों को जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि भारत को अब कच्चे समुद्री उत्पादों के बड़े पैमाने पर निर्यात से आगे बढ़कर वैल्यू-ऐडेड उत्पादों जैसे ब्रेडेड स्क्विड रिंग्स, सुरिमी और रेडी-टू-ईट फिश फिलेट्स पर ध्यान देना चाहिए। वर्तमान में भारत का मूल्यवर्धित समुद्री उत्पाद निर्यात 742 मिलियन डॉलर का है, जबकि चीन, थाईलैंड, वियतनाम, इक्वाडोर और इंडोनेशिया जैसे देश इससे काफी आगे हैं।
नए उपायों की तैयारी में सरकार और उद्योग
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि देश में एक्सक्लूसिव एक्वाकल्चर जोन (विशेष मत्स्य क्षेत्र) स्थापित किए जाएं और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को तेज़ी से लागू किया जाए ताकि भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़ा रह सके। सीएमएफआरआई के निदेशक ग्रिन्सन जॉर्ज ने बताया कि संस्थान एक रोडमैप तैयार कर रहा है जिसमें व्यापारिक अड़चनों को दूर करने, वैल्यू-ऐडेड उत्पादों को बढ़ावा देने और वैश्विक बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
भारत के लिए यह वृद्धि ऐसे समय आई है जब अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ने और शुल्कों के चलते निर्यातकों को नुकसान की आशंका थी। फिर भी, विविध बाजारों में पैठ और उत्पाद विविधीकरण के प्रयासों ने भारत के समुद्री निर्यात क्षेत्र को मजबूती दी है।
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