विस्तार
AI IN AGRICULTURE: भारत के खेतों में एक ऐतिहासिक परिवर्तन का दौर शुरू हो चुका है। नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य की खेती डेटा, एल्गोरिदम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित होगी। किसी भी एआई प्रणाली की सफलता उसके डेटा आधार पर निर्भर करती है।
भारत में डिजिटल कृषि मिशन के माध्यम से दुनिया का सबसे बड़ा एआई-संचालित कृषि डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत फरवरी 2026 तक आठ करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई गई हैं। यह आईडी किसानों की डिजिटल पहचान है और उन्हें सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं से जोड़ती है।
मिशन के तहत 23.5 करोड़ फसल भूखंडों का सर्वेक्षण किया गया और जीआईएस मैपिंग का उपयोग करके प्रत्येक खेत में उगी फसल और मिट्टी की स्थिति का विस्तृत विवरण तैयार किया गया। इस डेटा को एग्रीस्टैक एआई प्रणाली के माध्यम से एकीकृत किया जा रहा है। एग्रीस्टैक एआई डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो किसानों और उनके खेतों का डेटा - जैसे भूमि, फसल, मिट्टी की स्थिति, सिंचाई और उत्पादन की जानकारी - एकीकृत करके मशीन-रीडेबल फॉर्मेट में उपलब्ध कराता है।
एग्रोवैक से खेती की सटीक निगरानी
एग्रोवैक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता सक्षम कृषि तकनीक प्लेटफॉर्म है, जो उपग्रह इमेजरी, ड्रोन डेटा और उन्नत एआई एल्गोरिदम का उपयोग करके फसलों का स्वास्थ्य, उत्पादन क्षमता और खेत की स्थिति का विश्लेषण करता है। यह प्रणाली किसानों को डेटा-आधारित, वास्तविक समय में सूचना और सिफारिशें प्रदान करती है, जिससे वे समय पर और सटीक निर्णय ले सकते हैं।
यह प्लेटफॉर्म खेतों का ‘बर्ड्स आई व्यू’ दृश्य प्राप्त करने के लिए सैटेलाइट और ड्रोन से चित्र एकत्र करता है। एआई आधारित इमेज प्रोसेसिंग से पौधों में तनाव, रोग, जल तनाव और पोषक तत्वों की कमी का पता लगाया जाता है।
इन सूचनाओं के आधार पर किसान सिंचाई, उर्वरक, कीटनाशक और अन्य प्रबंधन संबंधी निर्णय सटीक और समयबद्ध तरीके से ले सकते हैं। एग्रोवैक के सिस्टम ने लक्षित हस्तक्षेपों के जरिये जल उपयोग में 20% की बचत सुनिश्चित की है। इसी तरह, ऑर्गेनिक ऑर्चर्ड का वैरिएबल-रेट उर्वरक मॉडल रोगों की पहचान में मदद करता है, रासायनिक कीटनाशक कम करता है और पैदावार बढ़ाता है।
भारतजेन एवं एग्री-परम एआई मॉडल
एग्री-परम एक स्वदेशी स्वायत्त एआई मॉडल है, जो 22 भारतीय भाषाओं में समझने और संवाद करने की क्षमता रखता है। यह पहल किसानों और डिजिटल प्रौद्योगिकी के बीच लंबे समय से चली आ रही भाषाई-बाधाओं को तोड़ते हुए भोजपुरी, मराठी और कन्नड़ जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में वैज्ञानिक तथा तकनीकी कृषि परामर्श को सुलभ बनाती है।
एग्री-परम मॉडल भारत सरकार द्वारा समर्थित बड़े भाषा मॉडल भारतजेन के राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र के अंतर्गत विकसित किया गया है। एग्री परम किसानों को फसल की योजना, कीट एवं रोग प्रबंधन, उर्वरक उपयोग तथा मिट्टी और जल संसाधनों की दक्षता बढ़ाने से जुड़ा सटीक, स्थान-अनुकूल मार्गदर्शन उनकी मातृभाषा में उपलब्ध कराता है।
किसान ई-मित्र से पाएं डिजिटल सलाह
डिजिटल कृषि मिशन और एग्रीस्टैक जैसी पहलों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए किसान ई-मित्र चैटबॉट ने किसानों के लिए त्वरित और सुलभ डिजिटल परामर्श तंत्र विकसित किया है। यह मंच 11 भारतीय भाषाओं में कृषि सेवाएं प्रदान करता है और अब तक 93 लाख से अधिक कृषि संबंधी प्रश्नों का समाधान कर चुका है। इसके माध्यम से किसानों को मौसम, फसल प्रबंधन, कीट नियंत्रण और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी मिल रही है।
कृषि पर केंद्रित एआई केसबुक
कृषि क्षेत्र में एआई के उपयोगों को रेखांकित करने के लिए विस्तृत केसबुक एआई इम्पैक्ट समिट में जारी की गई। इसमें वैश्विक और भारतीय कृषि में एआई के सफल प्रयोगों का संकलन है। इसका उद्देश्य ऐसे मॉडल्स सामने लाना था, जो खेत पर लागू किए जा सकते हैं। एआई केसबुक डाउनलोड लिंक और विवरण impact.indiaai.gov.in वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
फसल बीमा में एआई का विस्तार
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में एआई-आधारित प्लेटफॉर्म येस-टेक और क्रॉपिक के माध्यम से फसल नुकसान के आकलन की प्रक्रिया को अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध बना दिया है।
येस-टेक एक एआई-सक्षम फसल निगरानी मंच है, जो उपग्रह चित्रों, ड्रोन से प्राप्त तस्वीरों और स्थानीय मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण करता है। मशीन लर्निंग आधारित एल्गोरिदम पत्तियों के रंग, पौधों की ऊंचाई, खेत के पैटर्न और मिट्टी की नमी जैसे मानकों का विश्लेषण कर संभावित नुकसान का अनुमान लगाते हैं। क्रॉपिक भी डिजिटल इमेजिंग तकनीक पर आधारित उपकरण है, जिसका उपयोग विशेष रूप से फसल बीमा दावों के मूल्यांकन में किया जाता है।
एआई आधारित फसल सुरक्षा तंत्र
कृषि क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली ने एआई और डिजिटल डेटा विश्लेषण का उपयोग कर 66 फसलों और 432 से अधिक कीट प्रजातियों की निगरानी की है। यह प्रणाली समय पर चेतावनी और उपयुक्त नियंत्रण उपायों की जानकारी प्रदान करती है, जिससे कीट संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके और फसल हानि को न्यूनतम किया जा सके। इस पहल ने कृषि को अधिक सुरक्षित, वैज्ञानिक और पूर्वानुमान आधारित दिशा प्रदान की है।
ई-नाम एआई प्लेटफॉर्म
ई-नाम एआई प्लेटफॉर्म भारत की राष्ट्रीय कृषि बाजार पहल का उन्नत संस्करण है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण तकनीकों को एकीकृत किया गया है। एआई आधारित मूल्य पूर्वानुमान इसकी प्रमुख विशेषता है। यह प्रणाली स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय मंडियों के आंकड़ों का विश्लेषण कर फसलों के संभावित भाव का पूर्वानुमान प्रस्तुत करती है। इससे किसान यह निर्णय आसानी से ले सकते हैं कि अपनी उपज किस मंडी में और किस समय बेचनी अधिक लाभकारी होगी।
किसानों के लिए एआई प्लेटफॉर्म
केंद्रीय बजट 2026–27 में भारत-विस्तार नामक एक बहुभाषी एआई प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव रखा गया था, जो एग्रीस्टैक एआई डिजिटल प्लेटफॉर्म और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की अद्यतन जानकारियों को एकीकृत कर किसानों को स्थान-विशिष्ट और डेटा-आधारित सलाह प्रदान करता है, जिससे किसानों के निर्णय अधिक सटीक और प्रभावी बनते हैं।
इसके अंतर्गत ‘भारती’ नामक ध्वनि-आधारित एआई सहायक विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से किसान 155261 पर कॉल कर अपनी स्थानीय भाषा में मौसम पूर्वानुमान, मंडी भाव, कीट एवं रोग अलर्ट, मृदा स्वास्थ्य परामर्श, फसल एवं पशुपालन प्रबंधन तथा पैरामीट्रिक बीमा संबंधी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
भारत-विस्तार के अंतर्गत पीएम-किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि अवसंरचना कोष सहित दस से अधिक केंद्रीय योजनाओं की सेवाएं भी एकीकृत की गई हैं। इसमें किसानों के लिए योजनाओं में पात्रता की जांच, लाभ की स्थिति, आवेदन प्रक्रिया तथा शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं।
फसल योजना और पूर्वानुमान में एआई
एआई प्रणालियां मौसम, मिट्टी और बाजार संबंधी आंकड़ों का समेकित विश्लेषण कर जलवायु-अनुकूल फसल योजना तैयार करती हैं। उदाहरणस्वरूप, क्लाइमेट-एआई के सिस्टम रोपाई परिदृश्यों का सिमुलेशन कर किसानों को संभावित जोखिमों और अवसरों का पूर्वानुमान प्रदान करते हैं।
इसी प्रकार, जॉन डियर और आईबीएम वाटसन जैसे तकनीकी उपकरण स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर फसलों के चयन और उपज के पूर्वानुमान की सिफारिशें देते हैं। इन घोषणाओं और पहलों ने स्पष्ट कर दिया कि एआई इंडिया इम्पैक्ट समिट-2026 भारतीय कृषि को डेटा-आधारित और समावेशी विकास की दिशा में अग्रसर करने का एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करने वाला मंच बनकर उभरा है।