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अक्तूबर से पहले बकरियों का जरूर करा लें टीकाकरण : जानलेवा हैं प्लेग-चेचक रोग, जानें लक्षण और कारण

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 21 Sep 2025 02:11 PM IST
सार

बकरियों को पीपीआर (प्लेग) और चेचक रोग से बचाने के लिए टीकाकरण कराना जरूरी है। अक्तूबर से पहले ही बकरियों को प्लेग और चेचक का टीका जरूर लगवाना चाहिए। सरकारी पशु चिकित्सा केंद्रों पर ये टीके मुफ्त लगाए जाते हैं।

अक्तूबर से पहले बकरियों का जरूर करा लें टीकाकरण
अक्तूबर से पहले बकरियों का जरूर करा लें टीकाकरण - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सर्दियों के दौरान बकरियों में पीपीआर (प्लेग) और चेचक रोग तेजी से फैलता है। इससे पहले ही बकरियों को गंभीर मौसमी बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण कराना जरूरी है। अक्टूबर से पहले ही बकरियों को प्लेग और चेचक का टीका जरूर लगवा देना चाहिए। सरकारी पशु चिकित्सा केंद्रों पर ये टीके मुफ्त भी लगाए जाते हैं।

क्या होता है पीपीआर?
पीपीआर (Peste des Petits Ruminants) बीमारी, जिसे बकरी प्लेग या बकरियों की महामारी भी कहा जाता है, बकरियों और भेड़ों के लिए एक गंभीर वायरल संक्रमण है। यह रोग पैरामाइक्सोवायरस परिवार से संबंधित है और आमतौर पर उच्च मृत्यु दर (50-80%) के लिए जाना जाता है।

गंभीर मामलों में यह 100 प्रतिशत तक भी पहुंच सकता है। पीपीआर मुख्य रूप से बकरियों और भेड़ों को प्रभावित करता है, हालांकि कुछ अन्य घरेलू और जंगली जानवर भी इससे संक्रमित हो सकते हैं। भारत में बकरी पालन क्षेत्र में पीपीआर से सालाना लगभग साढ़े दस हजार करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है।

पीपीआर फैलने के कारण
  • अत्यधिक निकट संपर्क वाले पशु जल्दी संक्रमित होते हैं।
  • पीपीआर वायरस बीमार जानवर की आंख, नाक, लार और मल में पाया जाता है।
  • छींकने और खांसने से हवा के माध्यम से यह तेजी से फैलता है।
  • तनाव की स्थिति, जैसे परिवहन, गर्भावस्था, परजीवी या अन्य बीमारी, संक्रमण का जोखिम बढ़ाते हैं।
  • सभी उम्र और लिंग के जानवर इस रोग के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं।
  • 4 महीने से 1 साल तक के मेमने और युवा बकरियों में पीपीआर का खतरा अधिक होता है।

रोग के लक्षण
  • तेज बुखार
  • मुंह के छाले और छालेदार घाव
  • दस्त या कभी-कभी खूनी दस्त
  • निमोनिया और सांस लेने में कठिनाई
  • आंखों और नाक से पुटीय स्राव
  • गर्भवती भेड़ों और बकरियों में गर्भपात
  • संक्रमित जानवर के मुंह से दुर्गंध और होठों में सूजन

सावधानी और नियंत्रण
  • संक्रमित जानवरों को अन्य पशुओं से अलग करें।
  • संक्रमण फैलने वाले क्षेत्रों में कड़ाई से निगरानी करें।
  • समय पर टीकाकरण और पशु स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान दें।
  • संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से बचें और उचित सैनिटेशन अपनाएं। 

क्या है बकरियों में चेचक रोग?
बकरियों में फैलने वाला चेचक रोग विषाणुजनित है और रोगी बकरी के सीधे सम्पर्क में आने से अन्य बकरियों में फैलता है। इसे आम तौर पर त्वचा रोग या बकरी का विषाणु रोग कहा जाता है, क्योंकि इसमें शरीर पर दाने और घाव दिखाई देते हैं।

क्या हैं कारण?
  • रोग वायरस के कारण होता है।
  • संक्रमित बकरी के सम्पर्क में आने से स्वस्थ बकरियाँ संक्रमित हो जाती हैं।
  • रोग वातावरण, दूषित चारा-पानी और रोगी बकरी के संपर्क से फैलता है।

क्या हैं लक्षण?
  • शरीर पर लाल रंग के गोल-गोंल दाने उभर आते हैं। ये दाने फूले का रूप लेकर अंततः फूटकर घाव बन जाते हैं।
  • बकरी में बुखार आ जाता है।
  • कान, नाक, थर्नो और शरीर के अन्य हिस्सों में चकत्ते दिखाई देते हैं।
  • बीमार बकरी चारा कम खाती है और दूध उत्पादन या अन्य उत्पादन में कमी आती है।
  • पानी के पास रोगी बकरी अपना मुंह पानी में डालकर रख सकती है।

सावधानी और नियंत्रण
  • रोग के प्रकोप से बचाव के लिए प्रतिवर्ष रोग प्रतिरोधक टीके लगवाएं।
  • रोगी पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
  • बकरी के बिछोने और खाने की बची सामग्री को साफ-सुथरा रखें।
  • मृत पशु को जलाना या जमीन में गाड़ना आवश्यक है।
  • रोग होने पर एंटीबायोटिक्स का प्रयोग करें, ताकि अन्य संक्रमण और कीटाणुओं से बचाव हो सके।
  • संक्रमित जानवर को अलग करके सफाई और सैनिटेशन बनाए रखें।
  • पशुपालक को सतर्क रहना चाहिए और रोग के शुरुआती लक्षण देखते ही पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।