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कैसे करें बकरी और मधुमक्खी पालन? : यहां मिल रही ट्रेनिंग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 14 Sep 2025 07:06 PM IST
सार

प्रशिक्षण पूरी तरह व्यावहारिक अनुभव आधारित होता है, जिससे किसान सीधे प्रयोग कर सीख सकें। इसके अलावा किसानों को मार्केटिंग और बिक्री के तरीके भी सिखाए जाते हैं ताकि वे अपने उत्पाद को बेहतर दामों में बेचकर स्थायी आय सुनिश्चित कर सकें।
 

कैसे करें बकरी और मधुमक्खी पालन?
कैसे करें बकरी और मधुमक्खी पालन? - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बकरी पालन, मधुमक्खी पालन और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ने किसानों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस प्रशिक्षण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसे नाममात्र शुल्क पर उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।

देश के अधिकांश ग्रामीण किसान फसलों के साथ-साथ पशुपालन और मधुमक्खी पालन को मिलाकर मिश्रित कृषि अर्थव्यवस्था अपनाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान बकरी और मधुमक्खी पालन का वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीका सीख लें, तो वे न केवल पैदावार में वृद्धि कर सकते हैं बल्कि अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं।

प्रशिक्षण की विशेषताएं
कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सालभर अलग-अलग तिथियों पर कृषि विज्ञान केंद्र, सुल्तानपुर में आयोजित किया जाता है। इसमें किसानों को बकरी पालन की आधुनिक तकनीक, मधुमक्खी पालन के वैज्ञानिक तरीके, रखरखाव व प्रबंधन और उच्च उत्पादन व गुणवत्ता सुधार के उपाय सिखाए जाते हैं। 

प्रशिक्षण पूरी तरह व्यावहारिक अनुभव आधारित होता है, जिससे किसान सीधे प्रयोग कर सीख सकें। इसके अलावा किसानों को मार्केटिंग और बिक्री के तरीके भी सिखाए जाते हैं ताकि वे अपने उत्पाद को बेहतर दामों में बेचकर स्थायी आय सुनिश्चित कर सकें।

कैसे लें प्रशिक्षण में भाग? 
जो किसान इस प्रशिक्षण में हिस्सा लेना चाहते हैं, उन्हें किसी भी कार्य दिवस में कृषि विज्ञान केंद्र, सुल्तानपुर पहुंचना होगा। साथ में आधार कार्ड की फोटो कॉपी, दो पासपोर्ट साइज फोटो ले जाना जरूरी है। प्रशिक्षण की अवधि 21 दिन रखी गई है। प्रशिक्षण पूरा होने पर किसानों को प्रमाणपत्र (Certificate) भी प्रदान किया जाएगा।

किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम
कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि यह प्रशिक्षण न केवल किसानों को तकनीक सिखाता है बल्कि उन्हें व्यवसायिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनने और ग्रामीण क्षेत्र में स्थायी आय के अवसर पैदा करने में भी मदद करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम देशभर में बड़े पैमाने पर लागू किए जाएं, तो इससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार, पशुपालन उत्पादन में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।