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FTA: न्यूजीलैंड के सेब पर आयात शुल्क घटा, कश्मीरी बागवानों को सताई चिंता, सरकार पर लगाया वादा खिलाफी का आरोप

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 26 Dec 2025 02:33 PM IST
सार

मुक्त व्यापार समझौते के तहत सरकार द्वारा न्यूजीलैंड के सेबों पर आयात शुल्क में भारी गिरावट करने के फैसले पर कश्मीर के बागवानों ने चिंता जताई है। बागवानों ने इस फैसले को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किए गए वादों का उल्लंघन बताया है।

न्यूजीलैंड के सेबों को भारतीय बाजार में आसान पहुंच मिलने से भारतीय बागवान चिंतित।
न्यूजीलैंड के सेबों को भारतीय बाजार में आसान पहुंच मिलने से भारतीय बागवान चिंतित। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मुक्त व्यापार समझौते के तहत सरकार द्वारा न्यूजीलैंड के सेबों पर आयात शुल्क में भारी गिरावट करने के फैसले पर कश्मीर के बागवानों ने चिंता जताई है। बागवानों ने इस फैसले को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किए गए वादों का उल्लंघन करार दिया है। सरकार के इस कदम से कश्मीर घाटी के किसान और फल संघ खासे नाराज हैं और उनका कहना है कि यह फैसला उनकी आजीविका पर सीधा असर डालेगा।

कोल्ड स्टोरेज में रखे सेब पर होगा सीधा असर
सेब बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि यह फैसला सेब उत्पादकों के हित में नहीं है। इसका सीधा असर हमारे उस फल की बिक्री पर पड़ेगा जो अभी कोल्ड स्टोरेज में रखे हुए हैं।

बागनानों का दावा है कि बैठकों के दौरान सरकार ने वादा किया था कि विदेशी सेबों पर आयात शुल्क बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंत्री जी (शिवराज सिंह चौहान) ने हमसे वादा किया था कि विदेशी सेब पर आयात ड्यूटी बढ़ाई जाएगी, लेकिन उन्होंने ठीक इसका उल्टा कर दिया है। हम जल्द ही अपनी चिंताओं को लेकर सरकारी प्रतिनिधियों से मिलेंगे ताकि इन फैसलों को वापस लिया जा सके।

क्या है नया समझौता?
इस सब के बीच हाल ही में केंद्र सरकार ने साफ किया था कि भारत ने न्यूजीलैंड को अपने सेब बाजार में संतुलित पहुंच ही दी है और घरेलू उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए हैं।

समझौते की बात करें तो इसके तहत न्यूजीलैंड से आने वाले सेब पर सीमा शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी कर दिया गया है। इस समझौते के तहत भारत पहले साल में 25 फीसदी शुल्क पर 32,500 टन न्यूजीलैंड सेब के आयात की अनुमति देगा। यह मात्रा धीरे-धीरे बढ़ते हुए छठे वर्ष तक 45,000 टन तक हो जाएगी।

कुलगाम (दक्षिण कश्मीर) से सीपीआई (एम) विधायक मोहम्मद युसुफ तारिगामी ने इसे सेब बागवानों पर सीधा प्रहार बताया है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के लिए सेब आयात शुल्क को 50% से घटाकर 25% करना गलत है। देश में पहले से ही घरेलू उत्पादन का 22.5% आयात हो रहा है। ऐसे में सस्ते विदेशी सेब जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के उत्पादकों को और कुचल देंगे।

अर्थव्यवस्था की रीढ़ है सेब उद्योग
आंकड़ों पर नजर डालें तो जम्मू-कश्मीर भारत के कुल सेब उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा पैदा करता है। इस फैसले का प्रभाव इसलिए भी गहरा है क्योंकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 35 लाख लोग (कश्मीर की आबादी का लगभग आधा हिस्सा) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सेब उद्योग से जुड़े हैं।

कुल मिलाकर बागवानों को डर है कि विदेशी सेबों के बाजार में पहुंचने से भारतीय सेबों की मांग और भाव पर असर पड सकता है।