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Goatry Shunya Agritech And Icar Cirg Will Do Research On Hydroponic Fodder It Will Be Ready In 8 Days
शून्य एग्रीटेक और ICAR-CIRG लाएंगे हाइड्रोपोनिक चारा : कम पानी में भी सिर्फ 8 दिन में हो जाएगा तैयार
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Tue, 09 Sep 2025 08:01 PM IST
सार
शून्य एग्रीटेक और ICAR-CIRG मिलकर बकरी पालन और किसानों की कमाई को बढ़ावा देंगे। एक नई साझेदारी के तहत दो पक्ष मिलकर हाइड्रोपोनिक चारा पर शोध करेंगे, जिससे बकरी पालन में उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
विज्ञान और शोध के जरिए बकरी पालन को बढ़ावा देने की तैयारी।
- फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
भारत में हरे चारे की 35.6 फीसदी कमी है, जिसे दूर करने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए, शून्य एग्रीटेक और मथुरा के ICAR-केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG) के साथ 5 साल के लिए साझेदारी हुई है। इसका मकसद हाइड्रोपोनिक चारे पर शोध करना है ताकि बकरी पालन बेहतर हो और किसानों की कमाई बढ़े।
ICAR-CIRG के निदेशक मनीष कुमार चटली ने कहा, “हमारा मिशन विज्ञान और शोध के जरिए बकरी पालन को बढ़ाना है। यह साझेदारी छोटे और सीमांत किसानों की आय और पशु स्वास्थ्य को सुधारेगी।”
हाइड्रोपोनिक चारे पर शोध
शून्य एग्रीटेक और CIRG मिलकर हाइड्रोपोनिक चारे के लिए शोध करेंगे, जो बकरी के खाने में 25% तक कंसंट्रेट फीड की जगह ले सकता है। यह तकनीक 99% कम पानी और 90% कम जमीन का इस्तेमाल करती है और 8 दिन में चारा तैयार कर देती है, जबकि सामान्य चारे को 45 दिन लगते हैं।
हरे चारे की 35.6% कमी
भारत में 16.2 करोड़ बकरियां हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा हैं, लेकिन हरे चारे की 35.6% कमी है। इससे पशुओं की सेहत और किसानों की आय पर असर पड़ता है। यह साझेदारी इस कमी को दूर करने और टिकाऊ समाधान देने की कोशिश है।
किसानों और पशुओं को फायदा
हाइड्रोपोनिक चारा बकरियों की सेहत, प्रजनन दर और उम्र बढ़ाने में मदद करता है। इससे किसानों को कम खर्च में ज्यादा उत्पादन मिलेगा और उनकी आय भी बढ़ेगी। CIRG के 21 शोध केंद्र और शून्य का ग्रोथ एंड लॉजिस्टिक्स सेंटर मिलकर किसानों तक ये तकनीक पहुंचाएंगे।
शून्य एग्रीटेक के सीईओ विजय सिंह ने कहा, “यह साझेदारी हर किसान तक जलवायु-अनुकूल चारा पहुंचाने का हमारा लक्ष्य है। CIRG के साथ मिलकर हम बकरी पालन और किसानों की कमाई को बेहतर बनाएंगे।”
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