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सुभाष पालेकर कृषि मॉडल : प्रकृति के रास्ते समृद्धि, केमिकल और ऑर्गेनिक खेती से छुटकारा, जानें सबकुछ

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 02 Feb 2026 07:02 PM IST
सार

प्राकृतिक खेती के प्रणेता सुभाष पालेकर ने किसानों से केमिकल और ऑर्गेनिक दोनों तरह की खेती छोड़ने की अपील की है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग (ZBNF) या सुभाष पालेकर कृषि (SPK) ही सही रास्ता है।
 

प्राकृतिक खेती के प्रणेता सुभाष पालेकर (फाइल फोटो)
प्राकृतिक खेती के प्रणेता सुभाष पालेकर (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्राकृतिक खेती के प्रणेता सुभाष पालेकर ने किसानों से केमिकल और ऑर्गेनिक दोनों तरह की खेती छोड़कर जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग (ZBNF) अपनाने की अपील की है। द हिंदू को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि खेती को लंबे समय तक टिकाऊ, लाभकारी और कर्जमुक्त बनाने के लिए प्रकृति के सिद्धांतों पर आधारित सुभाष पालेकर कृषि (SPK) सबसे प्रभावी विकल्प है।

पालेकर के अनुसार, ग्रीन रेवोल्यूशन के दौर में केमिकल खेती जरूरी थी, लेकिन आज यह मिट्टी, पानी और भोजन तीनों को नुकसान पहुंचा रही है। वहीं, ऑर्गेनिक खेती भी बाहर से आने वाले महंगे इनपुट पर निर्भर होने के कारण किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ाती है। इसके विपरीत, ZBNF खेती पूरी तरह खेत आधारित है, जिससे लागत घटती है और आय बढ़ती है। उनका दावा है कि देशभर में करीब 70 लाख किसान इस पद्धति से लाभ उठा रहे हैं।

अनाज और फलों में घुल रहा जहर
सुभाष पालेकर के अनुसार, भारत में ग्रीन रेवोल्यूशन के समय केमिकल खेती जरूरी थी क्योंकि देश को खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित करनी थी। लेकिन अब यह तरीका नुकसानदायक साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि केमिकल खाद, कीटनाशक और खरपतवार नाशक मिट्टी, अनाज और फलों में जहर घोल रहे हैं, जिससे पूरी फूड चेन प्रभावित हो रही है। यह सिलसिला कभी नहीं रुकेगा, इसलिए केमिकल खेती को छोड़ना जरूरी है।

70 लाख किसान उठा रहे लाभ
ऑर्गेनिक खेती पर भी सवाल उठाते हुए पालेकर ने कहा कि यह भी पूरी तरह टिकाऊ नहीं है। ऑर्गेनिक खेती में बाहर से आने वाले इनपुट की जरूरत पड़ती है, जो महंगे होते हैं और समय के साथ उनकी मात्रा बढ़ानी पड़ती है। इससे खेती की लागत बढ़ती है और किसान कर्ज से मुक्त नहीं हो पाते। उन्होंने बताया कि ZBNF या SPK खेती प्रकृति के सिद्धांतों पर आधारित है और लंबे समय तक लाभ देने वाली है। इससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है और किसानों की आय लगातार बढ़ सकती है। पालेकर का दावा है कि आज देश में करीब 70 लाख किसान ZBNF पद्धति से खेती कर लाभ उठा रहे हैं।

क्या है सुभाष पालेकर कृषि (SPK)?
SPK मॉडल में सात मुख्य चरण हैं-  बीजामृत से बीज उपचार, जीवामृत से पोषण, पांच-स्तरीय खेती, बिना जुताई, बिना खरपतवार निकाले खेती, किसी भी तरह के केमिकल या ऑर्गेनिक बाहरी इनपुट का उपयोग नहीं और पशुपालन व मल्चिंग के साथ एकीकृत खेती।

पालेकर का कहना है कि SPK के सभी इनपुट खेत पर ही तैयार किए जा सकते हैं। बीजामृत और जीवामृत गाय के गोबर, मूत्र, गुड़, दाल का आटा और मिट्टी से बनाए जाते हैं, जबकि कीट नियंत्रण के लिए नीम और अन्य जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता है।

उन्होंने साफ किया कि ZBNF आलसी किसानों के लिए नहीं है। इसमें मेहनत जरूर लगती है, लेकिन यह खेती किसान को आत्मिक संतोष और आत्मनिर्भरता देती है। SPK को वे “आध्यात्मिक कृषि” भी कहते हैं, जिसका उद्देश्य प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर खेती करना और किसान को कर्ज व बाजार की निर्भरता से मुक्त करना है।