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Startup: स्मार्ट खेती से किसानों की आय बढ़ाकर भारत को दुनिया का खाद्य भंडार बना सकते हैं कृषि स्टार्टअप

अरविंद कुमार सिंह (वरिष्ठ कृषि पत्रकार) Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 14 Sep 2025 10:22 PM IST
सार

कृषि स्टार्टअप स्मार्ट खेती के जरिए किसानों की क्षमता और पैदावार बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। भारत को दुनिया का खाद्य भंडार बनाने में इनकी मजबूत भूमिका सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल ज्ञान की कमी, कमजोर ढांचे और फंडिंग की कमी जैसी बाधाओं को दूर करना होगा।

कृषि में स्टार्टअप युवाओं और छोटे किसानों के लिए काफी अहम।
कृषि में स्टार्टअप युवाओं और छोटे किसानों के लिए काफी अहम। - फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार

शहर हो या फिर देहात; पढ़े-लिखे नौजवान आज ‘स्टार्टअप’ शब्द से बखूबी वाकिफ हैं। करीब एक से डेढ़ दशक पहले यह शब्द चर्चा में भी नहीं था, लेकिन अब यह युवा-शक्ति का एक नया प्रतीक बन चुका है। भारत स्टार्टअप्स के मामले में अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में अग्रणी है। 15 अगस्त 2015 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टार्टअप इंडिया की घोषणा करते हुए कहा था कि उनका सपना है कि भारत का युवा नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने।

656 जिलों में सक्रिय हैं स्टार्टअप 
वर्ष 2017 में, भारत सरकार ने स्टार्टअप्स को आयकर छूट दी और स्टार्टअप पेटेंट प्रोटेक्शन स्कीम शुरू की। वर्ष 2020 में, स्टार्टअप सलाहकार परिषद बनी और 16 जनवरी 2022 से राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस मनाया जाने लगा। इन कदमों से पिछले पांच सालों में स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ी है। देश के 656 जिलों में स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी संख्या कम है। स्टार्टअप यानी नवाचार के जरिए रोजमर्रा की समस्याओं को हल करने वाली नई कंपनी, जिसे एक उद्यमी या कई लोग मिलकर शुरू कर सकते हैं। वर्ष 2016 में, सिर्फ 500 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स थे, जो जून 2022 तक बढ़कर 75000 हो गए। वर्ष 2020-21 के बाद 1,38,031 नए स्टार्टअप्स बने। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के मुताबिक, अब 1,80,683 स्टार्टअप्स को मान्यता मिल चुकी है, जिनसे 20 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। भारत सरकार स्टार्टअप्स में निवेश को बढ़ावा देने के लिए फंड ऑफ फंड्स, स्टार्टअप इंडिया सीड फंड और क्रेडिट गारंटी जैसी कई योजनाएं भी चला रही है। 

कृषि क्षेत्र में प्रोत्साहन के प्रयास
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत नवाचार और कृषि उद्यमिता कार्यक्रम स्टार्टअप्स को तकनीकी व वित्तीय सहायता देता है। इसके 5 नॉलेज पार्टनर्स और 24 आरकेवीवाई एग्री-बिजनेस इनक्यूबेटर्स स्टार्टअप्स को प्रशिक्षण देते हैं। एग्रीटेक सहित स्टार्टअप को समर्थन देने के लिए, सितंबर 2024 में शुरू एग्रीश्योर योजना के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 50 इनक्यूबेशन सेंटर्स स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा दे रहे हैं। स्टार्टअप्स के लिए केंद्र सरकार ने एक पोर्टल (agristartup.gov.in) भी बनाया है, जहां इसके बारे में तमाम जानकारियां मिल सकती हैं। स्टार्टअप और उद्यमियों को उनके उत्पादों, सेवाओं, व्यावसायिक प्लेटफार्मों को बाजार में लाने और आगे बढाने के लिए आइडिया व प्री-सीड स्तर में पांच लाख रुपये तक और सीड स्टेज में 25 लाख रुपये तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
कृषि क्षेत्र में बने 1943 स्टार्टअप्स
कृषि क्षेत्र में बने 1943 स्टार्टअप्स - फोटो : गांव जंक्शन
कृषि क्षेत्र में अभी इनकी संख्या सीमित है और सिर्फ 1943 स्टार्टअप्स ही बने हैं, जिन्हें 146.38 करोड़ रुपये की सहायता मिली है। हाल में, 150 से ज्यादा स्टार्टअप्स मोटे अनाजों पर काम कर रहे हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में स्टार्टअप्स की संख्या ज्यादा है, लेकिन उत्तर भारत में ये अभी कम हैं। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो कृषि स्टार्टअप्स शुरुआती दौर में ही लगते हैं।  

सरकारी स्तर पर कृषि स्टार्टअप्स के लिए नॉलेज पार्टनर्स के रूप में राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान, हैदराबाद, राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान, जयपुर, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली, कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, धारवाड़, तथा असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहाट काम कर रहे हैं। आरकेवीवाई-रफ्तार एग्री-बिजनेस इन्क्यूबेटर्स (आर-एबीआई) के तहत 24 प्रतिष्ठित संस्थान एग्री-बिजनेस इनक्यूबेटर्स के रूप में सहयोग दे रहे हैं। नाबार्ड के साथ सरकार ने ग्रामीण और एग्री स्टार्टअप्स के लिए 750 करोड़ रुपये का ‘एग्रीश्योर’ फंड भी शुरू किया है।  

कृषि स्टार्टअप्स जैव प्रौद्योगिकी, मशीनीकरण, कचरे से उपयोगी उत्पाद बनाने और कीटनाशक, खाद व सिंचाई के अत्यधिक उपयोग को नियंत्रित करने में मदद कर रहे हैं। एग्रीटेक, किसान रजिस्ट्री, कृषि मैपर और ई-मित्र के साथ जुड़कर ये स्टार्टअप्स सटीक सिंचाई, जैविक खेती और जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा दे रहे हैं। खाद्य प्रसंस्करण में 38 स्टार्टअप्स आगे आए हैं और स्मार्ट मोबिलिटी, डिजिटलीकरण, कृषि व ड्रोन में भी ये योगदान दे रहे हैं।  

हाल के सालों में कुछ कृषि स्टार्टअप काफी सुर्खियां बटोर चुके हैं। कई सफल उद्यमी भी प्रेरणा बने हैं। वोल्कस टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस स्टार्टअप ने फसल ब्रांड नाम के तहत सटीक कृषि के लिए एआई-संचालित आईओटी प्लेटफॉर्म विकसित किया है। वहीं, नेचुरा क्रॉप केयर ने जैविक और वनस्पति उत्पाद विकसित किए हैं। जबकि, निंजाकार्ट ने बिचौलियों को किनारे करके किसानों को सीधे खुदरा विक्रेताओं से जोड़ा है। लेकिन, कुल मिलाकर विशालकाय कृषि क्षेत्र में इनकी भूमिकाएं अभी भी सीमित हैं।

कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं 
भारतीय कृषि की चुनौतियों से लड़ने में स्टार्टअप्स मददगार हो सकते हैं। 140 करोड़ की आबादी वाले भारत में 57.8% लोग कृषि पर निर्भर हैं। 15 प्रकार की कृषि जलवायु के बावजूद, छोटे और सीमांत किसान पिछड़े हुए हैं। कृषि तकनीक, पशुपालन, सटीक और जैविक खेती में स्टार्टअप्स क्रांति ला सकते हैं, खासकर एआई के जरिए।  

वर्ष 2023 के बजट में वित्त मंत्री ने एग्रीटेक स्टार्टअप्स के लिए एक्सेलरेटर फंड की घोषणा की है। इसके पहले, वर्ष 2006 में, विश्व बैंक समर्थित राष्ट्रीय कृषि नवोन्मेष परियोजना ने 856 संस्थाओं के साथ कई तकनीकों का विकास किया, जिससे ग्रामीण उद्योग शुरू हुए और किसानों-उद्यमियों को लाभ मिला। वर्ष 2023-24 में, कृषि मंत्रालय ने स्टार्टअप्स के लिए 300 करोड़ का कोष बनाया। वर्ष 2020-21 से कृषि अवसंरचना निधि के लाभार्थियों में भी स्टार्टअप शामिल हैं।  

जमीनी स्तर पर देखें तो अन्य स्टार्टअप्स की तुलना में कृषि स्टार्टअप्स के साथ कई दिक्कतें हैं। इसके संचालक ग्रामीण क्षेत्रों  से आते हैं और नौकरशाही के स्तर पर उनको अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता। इनके पास प्रारंभिक पूंजी का अभाव रहता है। कई कृषि-स्टार्टअप प्रायः स्वतंत्र उत्पादन और विपणन को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन वे मूल्य शृंखला की चुनौतियों की उपेक्षा करते हैं। पर, स्टार्टअप और अन्य कृषि उद्यमों में अपार अवसर अभी भी हैं। इनके माघ्यम से खेती से मुंह मोड़ रहे युवाओं को भी जोड़े रखने में मदद मिल सकती है।

भारतीय कृषि क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और कई तरह की चुनौतियां भी हैं। वर्ष 2030 तक खाद्यान्नो की मांग 345 मिलियन टन हमें करनी होगी और उत्पादन बढ़ाने की जरूरत होगी। इसके लिए, विभिन्न प्रयासों को एग्रीटेक स्टार्टअप भी गति दे सकते हैं। एआई या डाटा एनालिटिक्स का उपयोग करने से स्टार्टअप को जलवायु परिवर्तन और मौसम व तापमान में बदलाव तथा इसके प्रभावों की निगरानी की जा सकती है। खेत से बाजार तक किसानों को मदद की जा सकती है। 

कृषि स्टार्टअप अधिकतर परामर्शी और चुनिंदा सेवाएं मुहैया कराते हैं। इनमें कृषि मशीनरी की कस्टम हायरिंग, ड्रोन सेवाएं, इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के जरिये कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले सामानों की खरीद व बिक्री, और सूचना प्रौद्योगिकी आदि शामिल हैं। कई स्टार्टअप डेयरी, मुर्गीपालन, मछली पालन, सूकर पालन, मधुमक्खी पालन और ऐसे अन्य क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पहले स्टार्टअप आईआईटी या एमबीए करने वाले ही शुरू करते थे, अब ग्रामीण युवा भी इसमें आगे बढ रहे हैं। महिलाओं का योगदान भी बढ़ा है।

ग्रामीण इलाकों में कृषि स्टार्टअप्स और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए रणनीतियों के साथ-साथ ठोस और उदार कदमों की जरूरत है। अगर अधिक ग्रामीण युवा उत्साह के साथ स्टार्टअप्स शुरू करें, तो वे कृषि क्षेत्र में क्रांति ला सकते हैं।