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Rajasthan Gram Panchayat Has Set An Example For Country With Farms And Livestock Receiving Organic Certificati
उपलब्धि : राजस्थान की ग्राम पंचायत बनी देश के लिए मिसाल, खेती और पशुओं को मिला ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 04 Jan 2026 05:01 PM IST
सार
राजस्थान का बामनवास कांकर उत्तर-पश्चिम भारत की पहली ऐसी पंचायत बन गई है, जिसे भूमि और पशुधन दोनों के लिए ऑर्गेनिक प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : AI Image
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विस्तार
देश में रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर बढ़ती निर्भरता, गिरते भूजल स्तर और स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं के बीच राजस्थान की एक दूरस्थ पंचायत ने नई उम्मीद जगाई है। कोटपूतली-बहरोड़ जिले की बामनवास कांकर पंचायत ने इस नए साल पर ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पूरी पंचायत को जैविक (ऑर्गेनिक) घोषित कर दिया है।
करीब 1500 हेक्टेयर कृषि भूमि और 6000 से अधिक पशुधन को ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन मिल चुका है। 2 जनवरी को पंचायत के किसानों, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं, ने शपथ ली कि वे अपने खेतों में अब कभी रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं करेंगे। इस पहल के साथ बामनवास कांकर उत्तर-पश्चिम भारत की पहली ऐसी पंचायत बन गई है, जिसे भूमि और पशुधन दोनों के लिए ऑर्गेनिक प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
किसानों की पहल से बदली तस्वीर
इस बदलाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह समुदाय द्वारा संचालित पहल है। लंबे समय से किसान मिट्टी की उर्वरता में गिरावट और स्वास्थ्य समस्याओं को महसूस कर रहे थे। इसके बाद गांव ने अल्पकालिक उत्पादन के बजाय दीर्घकालिक टिकाऊ खेती को अपनाने का फैसला किया।
इस पहल को तकनीकी और विपणन सहयोग मिला COFED (कोफार्मिन फेडरेशन ऑफ ऑर्गेनिक सोसायटीज़ एंड प्रोड्यूसर कंपनियों) से, जो प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, टिकाऊ खेती और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम कर रही है।
पर्यावरण से आगे भी है असर
COFED के संस्थापक जितेंद्र सेवावत ने इसे जन-आंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि लोगों की सामूहिक सोच का परिणाम है। उनका मानना है कि इससे न सिर्फ पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि मिट्टी की सेहत सुधरेगी, भूजल सुरक्षित रहेगा और किसानों की आमदनी बढ़ेगी।
गांव के निवासी महावीर ने कहा, “यह सिर्फ खेती का तरीका बदलना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक विरासत है। हम उन्हें ज़हरीली मिट्टी नहीं, बल्कि स्वस्थ जमीन और साफ पानी देना चाहते हैं।” बामनवास कांकर की यह पहल अब पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरी है।
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