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कमाल का डेयरी मॉडल : वाट्सएप के जरिए बिकता है दूध, सालाना 1 करोड़ से अधिक का कारोबार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 24 Dec 2025 01:29 PM IST
सार

वाट्सएप ग्रुप के जरिए 100 से अधिक नियमित ग्राहक जुड़े हैं। दूध 70 रुपये प्रति किलो, दही 120 रुपये, पनीर 600 रुपये, लस्सी 60 रुपये और मक्खन 1,000 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है। रोजाना 27-30 हजार रुपये की बिक्री से मासिक आय 8–9 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
 

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पंजाब के होशियारपुर जिले के मेहलनवाली गांव के सीमांत किसान संजीव कुमार काहोल की कहानी देश के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। जो खेती कभी सिर्फ परिवार का पेट पालने के लिए की जाती थी, वही आज एक सफल एग्री-एंटरप्रेन्योरशिप मॉडल में बदल चुकी है, जिससे उनका परिवार सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पारिवारिक परिस्थितियों के कारण बीएससी की पढ़ाई अंतिम वर्ष में छोड़ने वाले संजीव काहोल को 1990 के दशक में पिता और भाई के निधन के बाद खेती का जिम्मा संभालना पड़ा। पहले उनका परिवार परिवहन व्यवसाय से जुड़ा था। दो एकड़ जमीन पर वह लंबे समय तक सब्जियां और अनाज मुख्य रूप से घरेलू जरूरतों के लिए उगाते रहे, जबकि बाजार में बहुत सीमित मात्रा में बिक्री होती थी।

डेयरी प्रशिक्षण से बदली किस्मत
साल 2015-16 में काहोल के जीवन में बड़ा बदलाव आया, जब उन्होंने डेयरी फार्मिंग का औपचारिक प्रशिक्षण लिया और 16 लाख रुपये का कर्ज लेकर 10 गायों से डेयरी की शुरुआत की। सरकारी योजना के तहत 8 लाख रुपये की सब्सिडी का वादा किया गया था, जो कभी नहीं मिली, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

2018 में देशव्यापी डेयरी किसान आंदोलन के दौरान जब दूध कंपनियों ने खरीद बंद कर दी, तब उनके पास रोजाना करीब 200 किलो दूध बचने लगा। मजबूरी में उन्होंने सोशल मीडिया पर मुफ्त दूध देने की बात कही, लेकिन इसके बजाय स्थानीय दुकानदार और उपभोक्ता सीधे उनसे दूध खरीदने आने लगे। लोगों ने 40–45 रुपये प्रति लीटर तक भुगतान किया, जो कंपनियों द्वारा दिए जा रहे दाम से दोगुना था।

सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा उत्पाद
इस सकारात्मक प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर काहोल ने जुलाई 2018 से दूध की सीधी बिक्री शुरू की और कंपनियों को सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी। कुछ ही वर्षों में उन्होंने पूरा कर्ज चुका दिया। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान उन्होंने दूध से पनीर, दही, लस्सी और मक्खन जैसे उत्पाद बनाने शुरू किए, जिससे उनके कारोबार को और मजबूती मिली।

आज “फार्म फ्रेश सेफ फूड” ब्रांड के तहत उनका परिवार करीब 20 वैल्यू-एडेड डेयरी और कृषि उत्पाद बेचता है। बेटे कार्तिक डेयरी संचालन संभालते हैं, पत्नी रीता शर्मा प्रोसेसिंग का काम देखती हैं और संजीव काहोल खुद मार्केटिंग संभालते हैं।

वाट्सएप ग्रुप के जरिए जुड़े हैं ग्राहक
हर सुबह ई-रिक्शा से करीब 2.5 क्विंटल दूध और 50 किलो प्रोसेस्ड उत्पाद होशियारपुर शहर में बेचे जाते हैं। वाट्सएप ग्रुप के जरिए 100 से अधिक नियमित ग्राहक जुड़े हैं। दूध 70 रुपये प्रति किलो, दही 120 रुपये, पनीर 600 रुपये, लस्सी 60 रुपये और मक्खन 1,000 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है। रोजाना 27-30 हजार रुपये की बिक्री से मासिक आय 8-9 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।

प्राकृतिक खेती की तैयारी
डेयरी के साथ-साथ काहोल सब्जी उत्पादन और फलों के प्रसंस्करण में भी सक्रिय हैं। उनके खेत में आम, आंवला, नींबू, अमरूद, अंजीर सहित 42 फलदार पेड़ हैं, जिनसे अचार, मुरब्बा और पाउडर बनाए जाते हैं। अब वह अपनी पूरी जमीन को प्राकृतिक खेती में बदलने की योजना बना रहे हैं।

उनकी इस उपलब्धि के लिए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने उन्हें ‘सरदार सुरजीत सिंह ढिल्लों पुरस्कार’ से सम्मानित किया है। संजीव काहोल की यह यात्रा दिखाती है कि नवाचार, मूल्य संवर्धन और सीधी मार्केटिंग से सीमांत किसान भी बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।