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Maharashtra: सरकारी खरीद की खबर से सोयाबीन के दाम में आया उछाल, किसानों को मिली बड़ी राहत, जानें नया भाव

गांव जंक्शन डेस्क, मुंबई Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 15 Nov 2025 09:27 AM IST
सार

महाराष्ट्र में सरकारी खरीद शुरू होने से ठीक पहले सोयाबीन की कीमतों में तेजी आने लगी है। बाजार के मिजाज में इस बदलाव से किसानों के चेहरे पर खुशी लौट आई है। बीते कुछ दिनों से सोयाबीन उत्पादक जिलों की मंडियों में सोयाबीन के भाव लगातार बढ रहे हैं। इसके पीछे सरकारी खरीद की उम्मीद और मंडियों में सोयाबीन की आवक में कमी को वजह बताया जा रहा है।

महाराष्ट्र की कई मंडियों में सोयाबीन की कीमतें में उछाल।
महाराष्ट्र की कई मंडियों में सोयाबीन की कीमतें में उछाल। - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

महाराष्ट्र में सरकारी खरीद शुरू होने से ठीक पहले सोयाबीन की कीमतों में तेजी आने लगी है। बाजार के मिजाज में इस बदलाव से किसानों के चेहरे पर खुशी लौट आई है। बीते कुछ दिनों से सोयाबीन उत्पादक जिलों की मंडियों में सोयाबीन के भाव लगातार बढ रहे हैं। इसके पीछे सरकारी खरीद की उम्मीद और मंडियों में सोयाबीन की आवक में कमी को वजह बताया जा रहा है।

एमएसपी से ऊपर पहुंचा भाव
बीते महीने मूसलाधार बारिश और बाजार की अनिश्चितता के कारण हिंगणघाट जैसे कई इलाकों में सोयाबीन की कीमतें 500 रुपये प्रति क्विंटल के निचले स्तर तक गिर गई थीं, जिससे किसान चिंतित थे।

लेकिन, सरकारी खरीद का एलान होने के बाद बाजार की स्थिति तेजी से बदलाव आया है। जालना में सोयाबीन का अधिकतम भाव 6,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। कई मंडियों में तो भाव एमएसपी - 5,328 रुपये प्रति क्विंटल को भी पार कर गया है। मालकापुर (5,940 रुपये), जिंतूर (5,351 रुपये), यवतमाल (5,855 रुपये) और अकोला (5,570 रुपये) जैसी मंडियों में कीमतें एमएसपी से ऊपर चल रही हैं, जो बाजार में अच्छी खरीद और कम आवक का संकेत है।

सरकारी खरीद का असर
केंद्र सरकार ने मौजूदा खरीफ सीजन के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत 18,50,700 टन सोयाबीन की खरीद को मंजूरी दी है।

बारिश से फसल को भारी नुकसान
इस खरीफ सीजन में महाराष्ट्र में लगभग 50 लाख एकड में सोयाबीन की बुवाई हुई थी। लेकिन बीते दो महीने के दौरान हुई मूसलाधार बारिश ने कई जिलों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचाने का काम किया था। इस महीने हुई बारिश ने खेतों में रखी कटी हुई सोयाबीन की फसल को भी खराब कर दिया है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सोपा) के सितंबर के आकलन के अनुसार, लगभग आठ प्रतिशत फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। विदर्भ की एक किसान नीलिमा रेंगे ने कहा कि कुछ जिलों में फसल सड गई थी। बारिश ने निश्चित रूप से फसल को प्रभावित किया है।